- विपक्ष की नारेबाजी पर बोले ओम बिरला- देश चाहता है सदन चले
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में एक बार फिर विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के विचारों में भले ही अंतर हो सकता है, लेकिन देश चाहता है कि संसद चले और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो।
विपक्षी सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान लगातार नारेबाजी के कारण सदन का माहौल गरम रहा। अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन विरोध के नाम पर सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है।
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ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष से उनके विचार और सोच अलग हो सकते हैं, लेकिन देश की जनता चाहती है कि सदन चले। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसद में जनता के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों और देश से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए आते हैं। ऐसे में सदन की कार्यवाही बाधित होने से महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा का अवसर प्रभावित होता है।
बुधवार को लोकसभा में प्रश्नकाल तीन मिनट से भी कम समय तक चल सका। विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और सदन को चलने देने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई।
20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से अब तक एक भी दिन प्रश्नकाल पूरी तरह से नहीं हो पाया है। बुधवार को लगातार 18वां दिन रहा, जब प्रश्नकाल में व्यवधान पड़ा। प्रश्नकाल संसद की कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से सांसद सरकार से विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़े सवाल पूछते हैं तथा सरकार के कामकाज पर जवाब मांगते हैं।
प्रश्नकाल के लगातार प्रभावित होने से सरकार से सीधे सवाल पूछने और सार्वजनिक महत्व के विषयों पर जानकारी हासिल करने की संसदीय प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। विपक्ष भी अपने मुद्दों को सदन में उठाने के लिए चर्चा की मांग करता रहा है, लेकिन हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।
लोकसभा अध्यक्ष ने विरोध कर रहे सदस्यों से कहा कि विरोध और नारेबाजी के जरिए सदन की छवि खराब करना उचित नहीं है। उन्होंने सांसदों से संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं और सरकार की नीतियों का विरोध भी किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को यह भी समझाने का प्रयास किया कि जनता ने सांसदों को अपने मुद्दे उठाने और कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए चुना है। यदि सदन लगातार स्थगित होता है या कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ती है, तो इसका सीधा असर संसदीय कामकाज पर पड़ता है।
अध्यक्ष की अपील के बावजूद विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा। नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन में सामान्य तरीके से कामकाज कराना मुश्किल हो गया। स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इस तरह बुधवार को भी प्रश्नकाल अपने निर्धारित समय के अनुसार नहीं चल सका। मानसून सत्र में लगातार हो रहे व्यवधान के कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। सदन चलाने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाने का असर संसदीय कार्यवाही पर लगातार दिखाई दे रहा है।
संसद में हंगामा और विरोध कोई नई बात नहीं है। विपक्ष अक्सर सरकार का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित करने के लिए विरोध का सहारा लेता है। हालांकि, जब विरोध के कारण प्रश्नकाल और अन्य संसदीय कार्यवाही लगातार प्रभावित होती है, तो इस पर सवाल भी उठते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुधवार को दिया गया संदेश इसी व्यापक चिंता को रेखांकित करता है कि राजनीतिक असहमति के बावजूद सदन की कार्यवाही जारी रहनी चाहिए। सांसदों को अपने विचार रखने, सरकार से सवाल पूछने और नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन साथ ही सदन को प्रभावी ढंग से चलाना भी संसदीय जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मानसून सत्र के दौरान लगातार 18वें दिन प्रश्नकाल में व्यवधान ने इस गतिरोध को और स्पष्ट कर दिया है। बुधवार को भी तीन मिनट से कम समय तक प्रश्नकाल चलने के बाद कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध दूर करने के लिए क्या रास्ता निकलता है और क्या संसद की कार्यवाही नियमित रूप से चल पाती है।
संसदीय कामकाज के सुचारु संचालन के लिए दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहमति जरूरी मानी जाती है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष की अपील के बाद भी यदि विरोध जारी रहता है, तो मानसून सत्र के शेष दिनों में भी कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका बनी रह सकती है। फिलहाल बुधवार की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई है और सदन में जारी राजनीतिक गतिरोध खत्म करने की चुनौती बरकरार है।