- गंगा का बढ़ा जलस्तर, रावली तटबंध की सुरक्षा में जुटा सिंचाई विभाग
बिजनौर। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। पहाड़ों से पानी आने के कारण मालन और गंगा नदियां उफान पर हैं। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से हाल ही में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए रावली तटबंध पर भी खतरा मंडराने लगा है। तटबंध के आसपास बढ़ते जलस्तर और नदी के तेज बहाव को देखते हुए सिंचाई विभाग सतर्क हो गया है। विभाग की टीम मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तटबंध की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी की आवक बढ़ी है। पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहा है। इससे गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। नदी का बहाव तेज होने के कारण गंगा किनारे बसे इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है।
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रावली तटबंध हाल ही में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। तटबंध का उद्देश्य क्षेत्र को बाढ़ और नदी के कटान से सुरक्षा प्रदान करना है। लेकिन गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण अब इसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारियों की निगरानी बढ़ गई है।
नदी के पानी का दबाव बढ़ने के साथ तटबंध के आसपास कटान का खतरा भी पैदा हो सकता है। ऐसे में सिंचाई विभाग की टीम किसी भी संभावित नुकसान को रोकने के लिए मौके पर मौजूद है। मजदूरों की मदद से तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं।
विभागीय टीम द्वारा तटबंध की स्थिति का लगातार जायजा लिया जा रहा है। जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ यदि किसी हिस्से में दबाव या कटान के संकेत मिलते हैं तो तत्काल मरम्मत और बचाव कार्य किए जा सकें, इसके लिए टीम को मौके पर रखा गया है।
गंगा के साथ मालन नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते मालन में पानी की मात्रा बढ़ गई है। नदी के उफान पर होने से आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी हुई है।
बारिश का पानी लगातार नदियों में पहुंचने के कारण जलस्तर में अचानक वृद्धि की संभावना बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन और सिंचाई विभाग नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
रावली तटबंध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग ने मौके पर टीम तैनात कर दी है। अधिकारी मजदूरों के साथ तटबंध की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। संभावित कमजोर हिस्सों को चिह्नित कर वहां आवश्यक सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं।
बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंध की सुरक्षा के लिए समय रहते कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है। नदी के बहाव में तेजी आने पर तटबंध के किनारे कटान की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में विभागीय टीम की मौजूदगी से किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।
पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का सीधा असर गंगा के जलस्तर पर पड़ रहा है। ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है। मैदानी इलाकों में बारिश के साथ पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी के आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी में पानी बढ़ने के साथ बहाव भी तेज हो गया है। ऐसे में नदी के आसपास जाना जोखिम भरा हो सकता है।
रावली तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों में भी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तटबंध का निर्माण बाढ़ और कटान से सुरक्षा के लिए किया गया है, लेकिन गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।
लोगों की मांग है कि तटबंध की लगातार निगरानी की जाए और जहां भी कमजोर स्थिति दिखाई दे, वहां तत्काल सुरक्षा कार्य कराया जाए। साथ ही नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी स्थानीय लोगों तक भी पहुंचाई जाए, ताकि किसी आपात स्थिति में समय रहते सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
सिंचाई विभाग की टीम फिलहाल तटबंध की स्थिति और गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में संभावित संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
लगातार बारिश के कारण फिलहाल स्थिति पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है तो आने वाले समय में नदियों के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में तटबंध की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग को लगातार सक्रिय रहना होगा।
फिलहाल गंगा और मालन के उफान के बीच रावली तटबंध को लेकर प्रशासन और सिंचाई विभाग सतर्क है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से हाल ही में तैयार हुए इस तटबंध की सुरक्षा के लिए मजदूरों के साथ विभागीय टीम मौके पर मौजूद है। अधिकारियों की निगरानी और समय पर किए जा रहे सुरक्षा उपायों से संभावित खतरे को टालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, पहाड़ों पर बारिश जारी रहने की स्थिति में नदी के जलस्तर पर सभी की नजर बनी रहेगी।