17 महीने तक चली सुनवाई के बाद फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 17 महीने तक चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई साक्ष्य पेश किए। 7 अक्टूबर को अदालत ने रविता और अमरदीप को अमित कश्यप की हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा के सवाल पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और शुक्रवार को मृत्युदंड का फैसला सुनाया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आया था मामला
यह घटना 12 अप्रैल 2025 की बताई गई है। उस दिन अमित कश्यप का शव उनके घर में मिला था। शव के पास सांप मिलने के कारण शुरुआत में परिजनों और ग्रामीणों को सर्पदंश से मौत होने का संदेह था।
हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सांप का काटना नहीं, बल्कि दम घुटना बताया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और जांच के दौरान पत्नी रविता तथा उसके प्रेमी अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि हत्या को हादसा दिखाने और जांच को गुमराह करने की कोशिश की गई थी।
अभियोजन पक्ष ने की थी कड़ी सजा की मांग
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील के.के. चौबे ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि हत्या के बाद घटनास्थल पर सांप की मौजूदगी से मामले को सर्पदंश का रूप देने की कोशिश की गई थी।
अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद सजा सुनाई।
फैसले के बाद परिजनों ने जताया संतोष
फैसले के समय दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। वहीं, मृतक अमित कश्यप की मां और परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया। परिवार को उम्मीद थी कि अदालत दोषियों को कड़ी सजा देगी।
फिलहाल इस मामले में मृत्युदंड के फैसले से जुड़ी आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।