राज्य सरकार की इस पहल से जहां खाली पड़े मकानों का उपयोग बढ़ रहा है, वहीं सरकारी और निजी संस्थाओं को अपने कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने का अवसर भी मिल रहा है। वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल की रिक्त संपत्तियों के बेहतर उपयोग और आवासीय परिसरों में बसाहट बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
छह शहरों में संस्थाओं ने खरीदे 226 आवास
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की विभिन्न योजनाओं के तहत दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर, रायगढ़, नवा रायपुर अटल नगर और आरंग में अब तक 226 आवासों की बिक्री हुई है। इस संस्थागत खरीदी में जीएसटी विभाग, मेफेयर संस्था और मैट्स विश्वविद्यालय की प्रमुख भागीदारी रही है।
शहरवार खरीदे गए आवासों का विवरण इस प्रकार है:
दुर्ग: जीएसटी विभाग ने 24 मकान करीब 6.50 करोड़ रुपये में खरीदे।
जगदलपुर: 16 मकानों की खरीदी लगभग 6 करोड़ रुपये में की गई।
बिलासपुर: 25 मकान करीब 10.35 करोड़ रुपये में खरीदे गए।
रायगढ़: 3 मकानों का क्रय लगभग 92 लाख रुपये में हुआ।
नवा रायपुर अटल नगर: मेफेयर संस्था ने प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 128 मकान करीब 16.20 करोड़ रुपये में खरीदे।
आरंग: मैट्स विश्वविद्यालय ने 30 मकान लगभग 2.20 करोड़ रुपये में खरीदे।
इन सभी खरीदारियों का कुल मूल्य करीब 42.17 करोड़ रुपये बताया गया है।
विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय भी खरीदेगा 128 फ्लैट
नवा रायपुर अटल नगर में संस्थागत आवास खरीदी की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय ने 128 फ्लैट खरीदने का निर्णय लिया है। इन आवासों की अनुमानित कीमत करीब 16.20 करोड़ रुपये है।
प्रस्तावित खरीदी पूरी होने के बाद मंडल के आवासों की संस्थागत बिक्री में और बढ़ोतरी होगी। इससे विश्वविद्यालय को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के साथ लंबे समय से खाली पड़े भवनों के उपयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट के फैसले से खुला खाली मकानों की बिक्री का रास्ता
नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-16, 30 और 34 में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए बड़ी संख्या में मकान बनाए गए थे। योजना के पहले चरण में कुल 6,296 भवनों का निर्माण किया गया।
कई बार विज्ञापन जारी होने के बावजूद कुछ आवास नहीं बिक पाए। लंबे समय तक खाली रहने के कारण इन भवनों की सुरक्षा, रखरखाव और वित्तीय प्रबंधन को लेकर चुनौतियां सामने आ रही थीं।
इसे देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद ने 14 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके तहत तीन बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी नहीं बिकने वाले आवासों को पात्र हितग्राहियों के अलावा अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों और संस्थाओं को भी बेचने की अनुमति दी गई।
EWS और LIG हितग्राहियों को मिलता रहेगा अनुदान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र EWS और LIG हितग्राहियों को निर्धारित शासकीय अनुदान का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। वहीं, अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों और संस्थाओं को आवास खरीदने पर यह अनुदान नहीं मिलेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए लंबे समय से खाली पड़े आवासों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। इससे संस्थाओं को कर्मचारियों के लिए मकान खरीदने का विकल्प मिल रहा है और मंडल की अचल संपत्तियों के उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।
आवासों में बसाहट बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव के अनुसार, किसी भी आवासीय योजना की सफलता केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनमें नियमित बसाहट होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि बल्क परचेस की व्यवस्था से खाली भवनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और मंडल की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।
मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने बताया कि शासन के फैसले के बाद विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाएं आवासों की सामूहिक खरीदी में रुचि दिखा रही हैं। उन्होंने कहा कि आवासों के विक्रय की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से संचालित की जा रही है, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
आवासीय परिसरों में कर्मचारियों और उनके परिवारों के रहने से स्थानीय बाजार, परिवहन और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। साथ ही नियमित आबादी होने से भवनों की सुरक्षा और उपलब्ध नागरिक सुविधाओं के बेहतर उपयोग में भी मदद मिलेगी।
राज्य सरकार की इस नीति को प्रदेश में आवासीय योजनाओं को गति देने, रिक्त संपत्तियों का उपयोग बढ़ाने और व्यवस्थित शहरी बसाहट विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।