सुबह और रात के तय समय में ही जला सकेंगे पटाखे
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे जलाने के लिए दो समय निर्धारित किए हैं। लोग 7 और 8 नवंबर को ही सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक पटाखे जला सकेंगे।
इस दौरान सामान्य पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन पटाखे ही जलाए जा सकेंगे।
अस्पताल और स्कूलों के आसपास नहीं मिलेगी अनुमति
कोर्ट ने प्रदूषण और लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील स्थानों पर पटाखे जलाने पर रोक लगाई है।
अस्पताल और नर्सिंग होम।
स्वास्थ्य केंद्र और वृद्धाश्रम।
शैक्षणिक संस्थान।
घोषित साइलेंस जोन।
इन सभी स्थानों के 300 मीटर के दायरे को पटाखा-मुक्त क्षेत्र रखा जाएगा। प्रशासन को इन प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पूर्ण प्रतिबंध पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या है और पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाना इसका एक संभावित उपाय हो सकता है। हालांकि, कोर्ट के अनुसार इस फैसले के प्रभाव का आकलन करने के लिए पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2024 में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद AQI में कोई खास सुधार दर्ज नहीं हुआ था। ऐसे में केवल प्रतिबंध को प्रदूषण नियंत्रण का प्रभावी उपाय मानने पर सवाल उठता है।
क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, सामान्य पटाखों से कितने अलग?
ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं, जिन्हें सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इन्हें CSIR-NEERI ने तैयार किया है।
इनकी प्रमुख विशेषताएं हैं:
सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने का दावा।
हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल को सीमित करना।
धुआं और धूल कम करने की तकनीक।
शोर और उत्सर्जन को नियंत्रित करने का प्रयास।
हालांकि, ग्रीन पटाखे भी प्रदूषण फैलाते हैं। इन्हें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं माना जा सकता।
बिक्री के लिए तय होंगे विशेष केंद्र
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन को विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
जिलों के कलेक्टर और आयुक्त पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर बिक्री के लिए निर्धारित स्थान तय करेंगे। दुकानों पर जागरूकता संबंधी बैनर लगाने होंगे, जिनमें असली और प्रमाणित ग्रीन पटाखों की पहचान की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा दिल्ली-NCR में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच भी की जाएगी, ताकि सामान्य और अवैध पटाखों की आपूर्ति रोकी जा सके।
पटाखा कारोबारियों के लिए भी सख्त नियम
सुप्रीम कोर्ट ने निर्माताओं और दुकानदारों के लिए कई शर्तें निर्धारित की हैं।
वैध प्रमाणपत्र अनिवार्य: ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री के लिए CSIR-NEERI तथा PESO के वैध प्रमाणपत्र जरूरी होंगे।
सीलबंद पैकेट: पटाखे केवल सीलबंद डिब्बों में बेचे जा सकेंगे।
लड़ी-माला पर प्रतिबंध: एक साथ जुड़े पटाखों की लड़ियां बनाने और बेचने की अनुमति नहीं होगी।
बेरियम वाले पटाखों पर रोक: बेरियम युक्त और गैर-प्रमाणित पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।
QR कोड जरूरी: प्रत्येक पैकेट पर QR कोड होगा, जिससे निर्माता, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और टेस्ट सर्टिफिकेट की जानकारी मिल सकेगी।
लाइसेंस की अस्थायी बहाली: पात्र कारोबारियों के कुछ रद्द लाइसेंस 4 से 6 नवंबर तक अस्थायी रूप से बहाल किए जाएंगे।
उल्लंघन पर कार्रवाई: नियम तोड़ने वाले दुकानदारों का लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा।
सुरक्षा राशि जमा नहीं करने पर कारोबार में परेशानी
पटाखा निर्माताओं और विक्रेताओं को निर्धारित सुरक्षा राशि भी जमा करनी होगी। यदि कोई कारोबारी कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसकी जमा राशि जब्त की जा सकती है।
बच्चों और आम लोगों को जागरूक करने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल प्रतिबंध लगाने से संभव नहीं है। इसके लिए आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
कोर्ट ने वकीलों, फिल्मी हस्तियों और खिलाड़ियों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की है। विराट कोहली जैसे लोकप्रिय खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि चर्चित हस्तियां लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
स्कूलों में भी बच्चों को प्रदूषण के नुकसान और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, दिवाली पर दिल्ली-NCR में पटाखे जलाने की सीमित छूट जरूर दी गई है, लेकिन इसके साथ समय, स्थान, बिक्री और गुणवत्ता को लेकर कड़े नियम लागू रहेंगे। 9 नवंबर से फिर पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी होगा।