गृह मंत्री विजय शर्मा और सांसद महेश कश्यप बाइक पर तिरंगा लेकर एर्राबोर से रवाना हुए। वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने चिंगावरम से तिरंगा यात्रा की शुरुआत की। दोनों दिशाओं से निकली यात्राएं दोरनापाल में एकजुट हुईं, जहां बच्चों ने करीब 100 मीटर लंबे तिरंगे के साथ यात्रा का स्वागत किया।
इसके बाद यात्रा ताड़मेटला, बुरकापाल और जगरगुंडा होते हुए सिलगेर-टेकलगुड़ा पहुंची। जगह-जगह लोगों में तिरंगे को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
एर्राबोर का नाम बस्तर के माओवादी हिंसा के दर्दनाक इतिहास से भी जुड़ा रहा है। 16-17 जुलाई 2006 की घटनाओं ने इस क्षेत्र को गहरे जख्म दिए थे। ऐसे इलाके से तिरंगा यात्रा का निकलना बस्तर में बदलते हालात का प्रतीक माना जा रहा है।
जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में हिंसा पराजित हुई है और लोकतंत्र की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि अब हर घर, पंचायत और संस्थान पर तिरंगा लहराना बस्तर के स्वाभिमान की पहचान बनना चाहिए।