SCO के मंच से पीएम मोदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बना हुआ है और इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
‘आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल ‘एक्शन-रिएक्शन’ तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके पीछे मौजूद पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा।
उन्होंने आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग, उनकी भर्ती, कट्टरपंथीकरण और उन्हें सुरक्षित पनाह देने वाले नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की जरूरत बताई।
पीएम मोदी ने सदस्य देशों से अपील करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सभी देशों को स्पष्ट और एकजुट संदेश देना होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते।
आतंकवाद को रणनीतिक साधन बनाने वालों को संदेश
प्रधानमंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि जो राष्ट्र आतंकवाद को अपनी नीति या रणनीति का माध्यम बनाते हैं और आतंकियों को समर्थन या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी देश के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं माना जा सकता। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
टेरर फंडिंग पर लगाम लगाने पर जोर
पीएम मोदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उसके आर्थिक स्रोतों पर प्रहार करना जरूरी है।
उन्होंने आतंकवादियों की फंडिंग, भर्ती और कट्टरपंथीकरण के नेटवर्क को खत्म करने के लिए देशों के बीच बेहतर सहयोग और समन्वय की जरूरत बताई।
SCO के मंच से सामूहिक कार्रवाई की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयास तेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की चुनौती किसी एक देश तक सीमित नहीं है और इसका असर पूरी मानवता पर पड़ता है।
उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ एक स्वर में स्पष्ट नीति और प्रभावी कार्रवाई करने का आह्वान किया।
SCO शिखर सम्मेलन में आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा के विषयों में शामिल रहे। पीएम मोदी के बयान को आतंकवाद के खिलाफ भारत के लंबे समय से चले आ रहे कड़े रुख के तौर पर देखा जा रहा है।