करीब 42 वर्षों से चली आ रही दुर्गोत्सव की परंपरा के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ देवी के नौ रूपों की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। नवरात्रि के दौरान यहां दर्शन के लिए स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
कोलकाता के कारीगरों ने महीनों की मेहनत से तैयार किया पंडाल
ग्राम संडी मुड़पार में इस भव्य पंडाल को तैयार करने की प्रक्रिया कई महीने पहले शुरू हो जाती है। इस बार पंडाल को आकर्षक स्वरूप देने के लिए कोलकाता से आए कारीगरों की टीम ने मेहनत की है। इसके निर्माण और सजावट में बांस, कपड़े तथा विभिन्न सजावटी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है।
पंडाल को मंदिर जैसा स्वरूप देने के लिए की गई सजावट श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही है। मां दुर्गा के दर्शन के साथ लोग इसकी कलात्मक बनावट को भी निहार रहे हैं।
हर साल नई थीम, पिछले वर्ष बना था केदारनाथ मंदिर
सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की ओर से हर साल पंडाल के लिए अलग-अलग थीम चुनी जाती है। आयोजकों के मुताबिक, पिछले वर्ष पंडाल को केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया था। इस बार वृंदावन के प्रेम मंदिर से प्रेरित स्वरूप दिया गया है।
हर साल नई थीम के जरिए आयोजन को खास बनाने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान यह पंडाल स्थानीय लोगों के साथ दूसरे क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता है।
ग्रामीणों और व्यापारियों के सहयोग से होता है आयोजन
इस दुर्गोत्सव के आयोजन में सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों के साथ ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। प्रतिमा स्थापना, पंडाल निर्माण, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं में सभी मिलकर सहयोग करते हैं।
सामूहिक भागीदारी से आयोजित होने वाला यह उत्सव गांव की एकजुटता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बन गया है। नवरात्रि के दौरान पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और वातावरण माता रानी के जयकारों से गूंज उठता है।
42 साल से कायम है दुर्गोत्सव की परंपरा
ग्राम संडी मुड़पार में सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति करीब 42 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है। इतने वर्षों से जारी यह परंपरा गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई है।
इस बार प्रेम मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया पंडाल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है। धार्मिक आस्था, कारीगरों की मेहनत और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से संडी मुड़पार का दुर्गोत्सव नवरात्रि के दौरान अपनी अलग पहचान बना रहा है।