Dussehra 2026: विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। दशहरे पर रावण दहन के अलावा कई लोक परंपराएं भी प्रचलित हैं। इन्हीं में एक मान्यता रावण दहन के बाद बची राख और अधजली लकड़ी को घर लाने से जुड़ी है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और नकारात्मकता से बचाव होता है। आइए, पंडित मनीश गौतम के अनुसार इस परंपरा से जुड़ी मान्यताओं और जरूरी सावधानियों के बारे में जानते हैं।

रावण दहन की राख से जुड़ी क्या है धार्मिक मान्यता?
पंडित मनीश गौतम के अनुसार, रावण दहन विजयादशमी की एक प्रमुख परंपरा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन रावण के पुतले जलाए जाते हैं। कुछ स्थानों पर रावण दहन के बाद बची राख और अधजली लकड़ी को घर लाने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
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लोक मान्यताओं में इस राख को घर की सुख-समृद्धि और नकारात्मक प्रभावों से बचाव की कामना से जोड़ा जाता है। कुछ लोग इसे शुभ मानकर सुरक्षित स्थान पर रखते हैं। हालांकि, इन मान्यताओं के पीछे किसी वैज्ञानिक प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना चाहिए।

लाल या काले कपड़े में राख बांधने की परंपरा
कुछ लोक और तांत्रिक मान्यताओं में रावण दहन के बाद बची राख को लाल या काले कपड़े में बांधकर रखने का उल्लेख मिलता है। ऐसा करने को घर की सुरक्षा और नकारात्मक प्रभावों से बचाव की कामना से जोड़ा जाता है।

हालांकि, यह एक पारंपरिक मान्यता है, कोई प्रमाणित उपाय नहीं। राख को घर में रखने से परिवार की सुरक्षा या सुख-समृद्धि सुनिश्चित होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

क्या रावण दहन के बाद राख और अधजली लकड़ी घर लाना सही है?
धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन इस मामले में सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। रावण के पुतलों को जलाने में रंग, पेंट, पटाखे और अन्य रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में बची हुई राख या अधजली लकड़ी में हानिकारक अवशेष मौजूद हो सकते हैं।

इसलिए दहन स्थल से राख या अधजली लकड़ी उठाकर घर लाने से बचना बेहतर है। यदि कोई व्यक्ति इस परंपरा का पालन करना चाहता है, तो उसे आयोजन स्थल पर मौजूद सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए और अज्ञात राख या जली हुई सामग्री को सीधे हाथों से नहीं छूना चाहिए।
दशहरे का असली संदेश क्या है?

विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और सदाचार की जीत का प्रतीक भी है। भगवान श्रीराम और रावण से जुड़ा प्रसंग लोगों को अहंकार, अन्याय और बुराई से दूर रहने की प्रेरणा देता है।

इस दिन लोग भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं और अपने जीवन में अच्छे विचारों तथा व्यवहार को अपनाने का संकल्प लेते हैं। दशहरे का वास्तविक संदेश यही है कि व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों को दूर करे और सत्य, मर्यादा तथा जिम्मेदारी के रास्ते पर चले।

निष्कर्ष: रावण दहन के बाद राख और अधजली लकड़ी घर लाने की परंपरा कुछ स्थानों पर धार्मिक आस्था से जुड़ी है। लेकिन इसे सुख-समृद्धि या सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता। त्योहार की परंपराओं का पालन करते समय आस्था के साथ विवेक और स्वास्थ्य-सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
Published By- | 20-Oct-2026 09:54:00 am