आंगनबाड़ी केंद्र में हादसे के बाद हुई थी मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनसुखनी बाई आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत थीं। केंद्र में भोजन तैयार करने के दौरान आग लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गई थीं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 24 जनवरी 2024 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
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इस घटना से परिवार को गहरा आघात पहुंचा था। बेटी की असमय मृत्यु के बाद परिजन मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे थे। लंबे समय तक राशि नहीं मिलने के कारण परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
सीएम कैंप कार्यालय में लगाई थी मदद की गुहार
मुआवजा नहीं मिलने से परेशान मनसुखनी बाई के पिता रामसाय पैंकरा ने जशपुर जिले के बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या रखी थी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम आवेदन देकर लंबित मुआवजा प्रकरण का निराकरण कराने और परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कैंप कार्यालय ने संबंधित विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की पहल की। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार को 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि उपलब्ध कराई गई।
आर्थिक सहायता मिलने से परिवार को मिला सहारा
लंबे समय से प्रतीक्षित मुआवजा मिलने के बाद परिवार को आर्थिक राहत मिली है। इस राशि से परिजनों को अपनी जरूरतें पूरी करने और आर्थिक कठिनाइयों से निपटने में मदद मिलेगी।
रामसाय पैंकरा और उनके परिवार ने कठिन समय में सहायता दिलाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। परिवार के लिए यह आर्थिक मदद बेटी को खोने के दुख की भरपाई तो नहीं कर सकती, लेकिन इससे उनकी आर्थिक परेशानी कम करने में सहायता जरूर मिलेगी।
जरूरतमंदों की समस्याओं के समाधान पर जोर
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बगिया स्थित सीएम कैंप कार्यालय के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं और लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए पहल की जा रही है। यहां नागरिक आर्थिक सहायता, शासकीय योजनाओं का लाभ और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर नियमानुसार कार्रवाई कराने का प्रयास किया जाता है। मनसुखनी बाई के परिवार को मुआवजा मिलना भी इसी प्रक्रिया का एक उदाहरण है।
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना और लंबित मामलों का निराकरण सुनिश्चित करना है, ताकि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी प्रशासनिक स्तर पर राहत मिल सके।