मुजफ्फरपुर। दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की खरीदारी बढ़ जाती है। इसी बीच मिलावटी खाद्य सामग्री बाजार में आने की आशंका भी बनी रहती है। दूध, पनीर, मावा, छेना और घी जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में मिलावट स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी के समय सावधानी बरतने के साथ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी रखनी चाहिए।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केवल रंग, गंध, स्वाद या बनावट देखकर किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह शुद्ध या मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। घरेलू परीक्षण कुछ मामलों में शुरुआती संकेत दे सकते हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
दूध, पनीर और घी की शुद्धता कैसे जांचें?
1. पनीर, छेना और खोआ की जांच
पनीर, छेना या खोआ में स्टार्च की मिलावट का संदेह होने पर आयोडीन आधारित परीक्षण उपयोगी हो सकता है। स्टार्च मौजूद होने पर उपयुक्त आयोडीन परीक्षण में नमूने का रंग नीला-काला हो सकता है। हालांकि, यह परीक्षण हर तरह की मिलावट का पता नहीं लगाता। बेटाडीन या अन्य दवा से किया गया घरेलू परीक्षण भी प्रमाणिक खाद्य जांच का विकल्प नहीं है।
2. मिठाई पर लगी चांदी की वर्क की पहचान
मिठाइयों पर लगी चमकीली परत देखकर उसकी शुद्धता तय करना मुश्किल है। चांदी की वर्क और एल्युमिनियम की परत में अंतर केवल नाखून से रगड़कर या गोला बनाकर हमेशा सही तरीके से नहीं पहचाना जा सकता। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच कराने की सलाह दी जाती है।
3. दूध में मिलावट का पता कैसे लगाएं?
दूध को किसी चिकनी सतह पर गिराकर उसकी लकीर देखने जैसे घरेलू तरीके भरोसेमंद प्रमाण नहीं हैं। दूध में पानी, स्टार्च, डिटर्जेंट या अन्य पदार्थों की मिलावट की जांच के लिए अलग-अलग परीक्षणों की आवश्यकता होती है। इसलिए दूध की गुणवत्ता पर संदेह होने पर प्रयोगशाला जांच कराना बेहतर है।
4. असली घी की पहचान
घी के पिघलने, जमने या हाथ में रखने से उसकी शुद्धता की पुष्टि नहीं होती। तापमान के कारण शुद्ध घी भी