Public Impeachment: SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष का केंद्र सरकार पर हमला तेज हो गया है। INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को ‘सांकेतिक सार्वजनिक महाभियोग’ आयोजित करने का फैसला किया है। कार्यक्रम के लिए अन्य स्थानों पर अनुमति नहीं मिलने के बाद अब यह आयोजन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास पर होगा।

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच जारी टकराव अब एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। INDIA गठबंधन में शामिल 21 विपक्षी दल 30 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एकत्र होकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘जनता महाभियोग’ आयोजित करेंगे। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवालों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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विपक्ष का यह कदम संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के बाद उठाया जा रहा है। अब गठबंधन इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित महारैली के जरिए भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठाया जाएगा।

खड़गे के आवास पर होगा सार्वजनिक महाभियोग
INDIA गठबंधन की योजना के मुताबिक, 30 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास, 10 राजाजी मार्ग पर विपक्षी दलों के नेता जुटेंगे। यहां मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए सांकेतिक महाभियोग की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के लिए पहले अशोक होटल में आयोजन की योजना बनाई गई थी, लेकिन बाद में अनुमति रद्द कर दी गई। इसके बाद रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति भी नहीं मिलने की बात सामने आई।
विपक्ष का कहना है कि लगातार अनुमति संबंधी अड़चनों के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर ही यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। हालांकि, इस आयोजन को संवैधानिक महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया के बजाय विपक्ष के राजनीतिक विरोध कार्यक्रम के रूप में देखा जाना चाहिए।

SIR और वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपने अभियान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को प्रमुख मुद्दा बना रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है।

INDIA गठबंधन का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत हैं। इसी आधार पर विपक्ष निर्वाचन आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जवाबदेही की मांग कर रहा है।

वहीं, मतदाता सूची में नाम हटाने या किसी अन्य अनियमितता से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

संसद में भी उठ चुका है CEC को हटाने का मुद्दा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पहले संसद में भी उठाई जा चुकी है। विपक्षी दलों ने इस संबंध में नोटिस दिए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले नोटिस पर आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ सकी, जबकि दूसरे नोटिस को लेकर संसदीय स्तर पर कार्रवाई का मुद्दा चर्चा में है।
संसद के भीतर अपनी मांग उठाने के बाद अब विपक्ष सार्वजनिक अभियान के जरिए सरकार और निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। गठबंधन के नेताओं का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।

हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत ही पूरी हो सकती है। विपक्ष की ओर से आयोजित ‘जनता महाभियोग’ अपने आप में किसी संवैधानिक पदाधिकारी को हटाने की कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

13 अक्टूबर की बैठक में बनी थी रणनीति
इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने में 13 अक्टूबर को हुई INDIA गठबंधन की बैठक को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। इस बैठक में राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा की थी।

बैठक के दौरान एक वामपंथी सांसद की ओर से सुझाव दिया गया कि यदि संसद में महाभियोग संबंधी प्रस्ताव पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो रही है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

इसके बाद गठबंधन के नेताओं के बीच सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति बनी। इसी रणनीति के तहत 30 अक्टूबर को सांकेतिक महाभियोग और 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली की योजना तैयार की गई।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली
30 अक्टूबर का कार्यक्रम INDIA गठबंधन की व्यापक विरोध रणनीति का पहला चरण माना जा रहा है। इसके दो दिन बाद, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है।

इस रैली में विपक्षी दल ‘वोट चोरी’, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाएंगे। गठबंधन की कोशिश है कि इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बनाया जाए।

राहुल गांधी समेत विपक्ष के प्रमुख नेता चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर अभियान जारी रखने की बात कह चुके हैं।

विपक्ष के अभियान से बढ़ेगी सियासी हलचल
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन का यह कदम आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ इस पूरे विवाद का असर संसद और राजनीतिक मंचों पर भी दिखाई दे सकता है।

फिलहाल 30 अक्टूबर को खड़गे के आवास पर होने वाले कार्यक्रम और 1 नवंबर की महारैली पर सबकी नजरें टिकी हैं। इन आयोजनों के जरिए विपक्ष चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को कितना व्यापक समर्थन दिला पाता है, यह आगे की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम हो सकता है।
Published By- | 29-Oct-2026 03:23:00 pm