मुख्यमंत्री ने कहा कि करम परब आदिवासी समाज की पहचान और उसकी सदियों पुरानी परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक जीवन की भावना को मजबूत करता है।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने बांधा समां
फरसाबहार विकासखंड के बनगांव में आयोजित इस महोत्सव में जिले के विभिन्न इलाकों से नर्तक दल पहुंचे थे। उरांव समाज के हजारों लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में करम राजा के चारों ओर मांदर, ढोल और नगाड़ों की धुन पर सामूहिक नृत्य किया।
मुख्यमंत्री साय ने भी कलाकारों के बीच पहुंचकर उनके साथ नृत्य किया। उन्होंने लोक कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री ने खोला खजाना
करम महोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री ने बनगांव और आसपास के क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं कीं। इनमें सामाजिक और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
बनगांव में सामाजिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा।
सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा।
बनगांव में अखड़ा निर्माण कराया जाएगा।
सहसपुर में मिनी स्टेडियम बनाया जाएगा।
इन घोषणाओं से क्षेत्र में सामुदायिक गतिविधियों और खेलकूद को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
अपनी भाषा, गीत और परंपराओं को न भूलें युवा : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकास की दौड़ में आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक विरासत को भूलना नहीं चाहिए। जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं, लोकगीतों, भाषाओं और रीति-रिवाजों को पीढ़ियों से संभालकर रखा है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहें। करम परब हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने और समाज में एकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
जनजातीय महापुरुषों का योगदान देश के लिए गौरव : CM साय
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के ऐतिहासिक योगदान को भी याद किया। उन्होंने रानी दुर्गावती, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, गेंद सिंह और वीर बुधु भगत जैसे वीर नायकों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महापुरुषों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष कर साहस, त्याग और बलिदान की मिसाल पेश की। भगवान बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह का जीवन आज भी समाज को अन्याय के खिलाफ लड़ने और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश देता है।
किसानों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए योजनाओं का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। वहीं भूमिहीन कृषि मजदूरों को सालाना 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना, श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के जरिए भी पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास को मिल रही नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र तथा राज्य सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बस्तर में शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने से अब विकास कार्यों को नई दिशा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार की सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
मेडिकल कॉलेज, आर्चरी अकादमी और बिजली व्यवस्था पर भी फोकस
जशपुर जिले में विकास कार्यों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आर्चरी अकादमी विकसित की जा रही है।
इसके अलावा कुनकुरी विकासखंड के हर्राडांड़ में 400 केवी विद्युत सब स्टेशन स्थापित किया जा रहा है। इससे जिले की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल-पुलिया और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए भी काम जारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर के प्रत्येक गांव तक विकास की सुविधाएं पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। इसके साथ ही यहां की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
समारोह में ये लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, महोत्सव समिति के अध्यक्ष वेद प्रकाश भगत, कार्यकारी अध्यक्ष बलराम भगत सहित आयोजन समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, उरांव समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
बनगांव का यह करम महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ जनजातीय एकता और सांस्कृतिक विरासत का बड़ा उत्सव बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री की विकास संबंधी घोषणाओं ने आयोजन को अतिरिक्त महत्व दिया।