WhatsApp पर भेजे गए मैसेज से शुरू हुआ विवाद
पूजा जायसवाल के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक सम्मान समारोह से संबंधित समाचार को लेकर हुई। उन्होंने एक खबर में भाजपा नेत्री गायत्री केशरवानी का नाम और तस्वीर देखकर वह खबर WhatsApp पर उन्हें भेजी थी। इसी दौरान किसी अन्य व्यक्ति के साथ चल रही निजी बातचीत का एक संदेश गलती से खबर के साथ नेत्री को भी चला गया।
महिला पत्रकार का दावा है कि गलती का एहसास होते ही उन्होंने स्थिति स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने बताया कि संबंधित संदेश उनके लिए नहीं था और उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी थी। हालांकि, इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ और मामला लगातार बढ़ता चला गया।
फोन पर धमकी देने का भी लगाया आरोप
महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि घटना से पहले गायत्री केशरवानी के पति राजेश केशरवानी ने उन्हें फोन किया था। बातचीत के दौरान कथित तौर पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। पूजा का दावा है कि उन्हें पुलिस और मीडिया को पैसे से प्रभावित करने तथा उनकी छवि खराब कर जीवन बर्बाद करने जैसी बातें भी कही गईं।
रात करीब 8 बजे घर पहुंचने का दावा
पूजा जायसवाल के आरोप के मुताबिक, रात करीब 8 बजे भाजपा नेत्री गायत्री केशरवानी कुछ महिलाओं और अन्य लोगों के साथ उनके घर पहुंचीं। उनके साथ करीब 10 लोग मौजूद थे। इनमें नेत्री की बेटी जेश केशरवानी और नीतू सहित अन्य महिलाएं भी शामिल थीं।
महिला पत्रकार का आरोप है कि घर पहुंचते ही उनके साथ विवाद और गाली-गलौज शुरू कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर हाथ-मुक्कों और लातों से मारपीट की गई। उन्होंने बताया कि घटना में उन्हें चोटें आई हैं और बाद में अस्पताल में उनका मेडिकल परीक्षण (MLC) भी कराया गया।
बच्चों के सामने हुआ हंगामा, मां को भी लगी चोट
पीड़िता के मुताबिक, घटना के समय उनके बच्चे घर के एक कमरे में मौजूद थे। अचानक घर में हंगामा और मारपीट शुरू होने से बच्चे बुरी तरह डर गए। उन्होंने कमरे के भीतर से आवाज लगाई। इसी दौरान बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उनकी मां बीच-बचाव करने पहुंचीं।
पूजा का आरोप है कि इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में उनकी मां को भी चोटें आईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ मारपीट नहीं हुई, लेकिन पूरी घटना का उन पर मानसिक असर पड़ा। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी बीच-बचाव कर विवाद शांत कराने की कोशिश की।
CCTV फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट से जांच की मांग
महिला पत्रकार ने पुलिस प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि घर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज से घटना के समय पहुंचे लोगों की संख्या और मारपीट में शामिल व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
उन्होंने पुलिस से शिकायत में नामजद सभी लोगों की भूमिका की जांच करने के साथ मेडिकल रिपोर्ट, CCTV फुटेज और कथित फोन धमकियों से जुड़े साक्ष्यों को जांच में शामिल करने की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच और दूसरे पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना महत्वपूर्ण होगा। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।