ग्रामीणों का कहना है कि पुल को सबसे अधिक नुकसान अवैध रेत खनन और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से हुआ है। समय के साथ पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा लगातार धंसता जा रहा है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पुल के दोनों ओर रेलिंग लगाकर चेतावनी बोर्ड लगाए हैं और लोगों को पुल से आवागमन नहीं करने की सलाह दी है। इसके बावजूद कई लोग मजबूरी में मोटरसाइकिल और अन्य दोपहिया वाहनों से पुल पार कर रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें
हाराडुला का यह पुल क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसके क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और रोजमर्रा के कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्ग लंबा और असुविधाजनक होने के कारण लोग जोखिम उठाकर इसी पुल का उपयोग कर रहे हैं।
बारिश ने बढ़ाई चिंता
लगातार बारिश के चलते महानदी सहित क्षेत्र की नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। तेज बहाव और बढ़ते दबाव से पुल के नीचे कटाव भी तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत या नए पुल के निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के दौरान बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल की तत्काल मरम्मत या नए पुल के निर्माण की मांग करते हुए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।