हिंसा के माहौल से नई जिंदगी की ओर कदम
आत्मसमर्पित महिलाओं ने बताया कि बस्तर में हिंसा और मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर अब उन्हें अपने जीवन को नए नजरिए से देखने का अवसर मिल रहा है। उनके लिए बड़े मंच पर सैकड़ों लोगों के सामने रैंप वॉक करना कभी कल्पना से भी परे था।
फुनेमदेवे ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि मार्च 2026 से पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इतने बड़े मंच पर रैंप वॉक करेंगी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के सीमित अवसरों के बावजूद अब उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और नई पहचान बनाने का मौका मिल रहा है।
कोसा और हैंडलूम को बढ़ावा देने की पहल
रैंप वॉक में महिलाओं ने पारंपरिक कोसा और हैंडलूम परिधान पहनकर बस्तर की संस्कृति और कला को प्रदर्शित किया। आत्मसमर्पित महिलाएं अब रेशम, हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही हैं।
महिलाओं ने बताया कि रैंप वॉक उनके लिए सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि पुराने जीवन से निकलकर नई पहचान की ओर बढ़ने का अनुभव था। दर्शकों की तालियों और उत्साह ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया।
सम्मेलन में दिखी स्वदेशी उत्पादों की झलक
प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में प्रदेशभर से बुनकर, शिल्पकार और कलाकार शामिल हुए। परिसर में हथकरघा, हस्तशिल्प, रेशम, माटीकला और अन्य स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी आत्मसमर्पित महिलाओं से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव भी मौजूद रहे।


‘कोशल फैब’ ब्रांड की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन किया। इसके जरिए छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को देश-विदेश के बाजार तक पहुंचाने की योजना है।
935 मेधावी छात्रों को मिली प्रोत्साहन राशि
सम्मेलन में मेधावी विद्यार्थियों, वरिष्ठ बुनकरों, शिल्पकारों और माटी शिल्पियों को पुरस्कार, अनुदान और आधुनिक उपकरण प्रदान किए गए। 935 मेधावी छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई।
आयोजन में बुनकरों को आवास, आधुनिक करघे और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजनाओं की भी जानकारी दी गई। सरकार की ओर से हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने पर जोर देने की बात कही गई।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का यह आयोजन बुनकरों और कारीगरों को मंच देने के साथ-साथ बस्तर की आत्मसमर्पित आदिवासी महिलाओं के लिए नई जिंदगी, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की प्रेरणादायक तस्वीर बनकर सामने आया।