अपने संबोधन में मोहन भागवत ने एकता, विविधता और मानवता को लेकर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत की भावना एक ही है। भारत की पहचान विविधता में एकता से है और यह भावना भारतीय समाज के मूल स्वभाव में मौजूद है।
‘हम अलग दिखते हैं, लेकिन हैं एक ही’
मोहन भागवत ने कहा, “धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन भाव एक होता है। हम दिखते जरूर अलग-अलग हैं, लेकिन हैं एक ही।” उन्होंने कहा कि भारत के लोगों के लिए एकता और विविधता दोनों ही उनके ‘DNA’ में बसी हुई हैं।
उन्होंने अमेरिका के संदर्भ में ‘प्लूरलिज्म’ और भारत के संदर्भ में ‘विविधता में एकता’ की चर्चा करते हुए कहा कि अलग-अलग पहचान और परंपराएं होने के बावजूद मानवता के स्तर पर सभी एक हैं।
हर राष्ट्र का अपना मिशन और विजन
RSS प्रमुख ने कहा कि देश केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक राष्ट्र की दुनिया में एक विशेष भूमिका होती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र की अपनी एक विशेष नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है।
उन्होंने कहा कि हर राष्ट्र का अपना मिशन और विजन होता है। इसी दौरान उन्होंने कहा, “नर चाहे तो नारायण बन सकता है।” उनके मुताबिक इंसान ही दुनिया में होने वाली घटनाओं के लिए जिम्मेदार है।
भागवत ने लोगों से सही सोच और सत्य की तलाश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक और सही सोच इंसान को ईश्वर के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे अपने बेहतर मानवीय स्वरूप से दूर कर सकती है।
भौतिक सुख स्थायी खुशी नहीं दे सकते
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भौतिक सुख-सुविधाओं को लेकर भी उदाहरण दिया। उन्होंने न्यूयॉर्क के लोकप्रिय डोनट्स का जिक्र करते हुए समझाया कि किसी पसंदीदा चीज का आनंद भी एक सीमा तक ही खुशी देता है।
उन्होंने कहा कि इंसान कितनी भी भौतिक सुख-सुविधाएं हासिल कर ले, उनकी एक सीमा होती है। कुछ समय बाद वही चीज आकर्षण खो देती है और व्यक्ति फिर से उसी सुख की तलाश में लग जाता है।
भागवत ने कहा कि भौतिक खुशी कुछ समय के लिए होती है और हमेशा के लिए संतुष्टि नहीं दे सकती। उनके मुताबिक वास्तविक संतुष्टि केवल भौतिक उपलब्धियों से हासिल नहीं की जा सकती।
दुनिया को एकता का संदेश देने की बात
मोहन भागवत ने कहा कि भारत का काम दुनिया को यह बताना है कि मानवता मूल रूप से एक है। उन्होंने कहा कि विविधता एकता की शोभा बढ़ाती है, इसलिए अलग-अलग धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के बीच आपसी सम्मान और एकता जरूरी है।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भागवत ने वैश्विक स्तर पर मानव एकता, विविधता के सम्मान और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।