गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। नदी का पानी बढ़ने के कारण एक बार फिर घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। इसके साथ ही घाटों पर होने वाले दैनिक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी प्रभावित हो रहे हैं।
चेतावनी बिंदु के करीब पहुंची गंगा
वाराणसी में गंगा नदी के लिए खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण गंगा तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
10 दिनों से बंद है नौका संचालन
गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 10 दिनों से अधिक समय से नौका संचालन पर रोक लगी हुई है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों और घाटों से जुड़े कारोबारियों पर इसका असर पड़ रहा है।
वहीं, वाराणसी के दो प्रमुख श्मशान घाट मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर भी बढ़ते जलस्तर का असर पड़ा है। पानी बढ़ने के कारण शवदाह स्थलों में बदलाव करना पड़ा है।
छत पर हो रही गंगा आरती
गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर होने वाली दैनिक गंगा आरती भी प्रभावित हुई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरती को घाट की सीढ़ियों के बजाय छत पर आयोजित किया जा रहा है।
प्रशासन अलर्ट, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। तटवर्ती क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है और लोगों को घाटों से दूरी बनाए रखने के साथ सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
यदि गंगा के जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में वाराणसी में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहले से ही भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बना हुआ है, ऐसे में वाराणसी में गंगा का तेजी से बढ़ता जलस्तर प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।