बैठक के दौरान भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के साथ व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ईरान के साथ अपनी पुरानी और मजबूत दोस्ती को विभिन्न क्षेत्रों में और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
व्यापार बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ अपने व्यापार का दायरा बढ़ाने और उसमें विविधता लाने की दिशा में काम करना चाहता है। दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा भी की।
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि सभी विवादों और मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।
शांति और स्थिरता पर भारत का जोर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बैठक सार्थक रही। पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
भारत ने नेविगेशन और व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी अपना पक्ष रखा। भारत का कहना है कि क्षेत्र में तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर नहीं पड़ना चाहिए।
हॉर्मुज संकट पर नजर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हॉर्मुज क्षेत्र की स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। किसी भी तरह की रुकावट का असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा भी भारत के लिए अहम मुद्दा है। भारत लगातार सुरक्षित समुद्री आवागमन और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दे रहा है।
भारत-ईरान कनेक्टिविटी के लिए भी अहम बैठक
दोनों देशों के संबंधों में कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत और ईरान के सहयोग से विकसित हो रहा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भारत को ईरान के रास्ते मध्य एशिया और रूस से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है।
ऐसे में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय तनाव को बातचीत और कूटनीति के जरिए कम किया जाना चाहिए।