मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सली हिंसा ने लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के लोगों को भय और असुरक्षा के माहौल में रखा। उन्होंने कहा कि हिंसा के रास्ते पर चलने वाले और निर्दोष नागरिकों की जान लेने वालों को किसी भी स्थिति में आदर्श नहीं माना जा सकता।
हिंसा का महिमामंडन समाज के लिए घातक
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग हिंसा के लिए जिम्मेदार कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा कि हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के जरिए बस्तर की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।
साय ने कहा कि ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना या उनके समर्थन में नारे लगाना उचित नहीं है। लोकतांत्रिक समाज में असहमति और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा और निर्दोषों की हत्या को सही ठहराना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
‘बंदूक उठाने वाला आदर्श नहीं हो सकता’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक के बल पर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा के कारण बस्तर में आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षाबलों के जवानों ने अपनी जान गंवाई है।
उन्होंने कहा कि इस हिंसा से अनेक परिवार प्रभावित हुए और लंबे समय तक क्षेत्र के विकास पर भी इसका असर पड़ा। ऐसे में हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का अपमान है।
नक्सलवाद केवल जंगल और बंदूक की चुनौती नहीं
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती केवल जंगलों और हथियारों तक सीमित नहीं है। हिंसा को सही ठहराने और हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के तौर पर पेश करने वाली मानसिकता भी चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों की आड़ में हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता।
‘बस्तर की बदल रही पहचान’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब धीरे-धीरे हिंसा और भय की पहचान से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ दूरस्थ इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
साय ने कहा कि बस्तर के युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बस्तर की नई पीढ़ी अब अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
‘बस्तर का युवा बंदूक नहीं, किताब और रोजगार चाहता है’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहता है। युवा अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं और प्रदेश एवं देश के विकास में भागीदार बनना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त अवसर मिलें और प्रत्येक परिवार तक विकास एवं सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।
‘नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई बस्तर के भविष्य की लड़ाई’
साय ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती नहीं थी, बल्कि यह बस्तर के भविष्य को सुरक्षित करने की लड़ाई भी थी। उन्होंने सुरक्षाबलों के जवानों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके साहस और बलिदान से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक दिशा मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समाज की भी जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा और हिंसा के जिम्मेदार लोगों का किसी भी रूप में महिमामंडन न होने दिया जाए।
‘नए छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के लिए कोई स्थान नहीं’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब शांति, लोकतंत्र और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। नए छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श ऐसे लोग होने चाहिए, जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के जरिए समाज को आगे बढ़ा रहे हैं।
साय ने कहा कि बस्तर में शांति केवल सरकार और सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की भी जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाकर बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना सरकार की प्राथमिकता है।