‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ पर जोर
बैठक में अपने शुरुआती संबोधन में मल्लिकार्जुन खरगे ने संविधान सभा के लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के वोट का समान महत्व और अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
खरगे ने राहुल गांधी की ओर से विभिन्न राज्यों में उठाए गए चुनाव संबंधी सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के समाधान के बजाय चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के तहत करीब 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इस प्रक्रिया से वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
खरगे ने मांग की कि यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो इसकी वजह सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार मिलना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों की ओर से पिछले कुछ महीनों में कई बार आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
इसी आधार पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। हालांकि, ये दावे कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की ओर से उठाए गए सवाल हैं।
2023 के नियुक्ति कानून पर भी आपत्ति
खरगे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है। उनके अनुसार इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
युवाओं के मतदाता पंजीकरण को आसान बनाने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग से मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की, ताकि नए मतदाताओं को पंजीकरण के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
इंडिया गठबंधन की बैठक में उठाए गए इन मुद्दों के बाद चुनाव आयोग, SIR, ईवीएम और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष की रणनीति पर चर्चा तेज होने के संकेत हैं।