चार महीने बाद फिर खुलेंगे कुटुमसर गुफा के द्वार
कुटुमसर गुफा को मानसून के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 17 जून से 30 सितंबर तक बंद रखा गया था। बारिश के मौसम में जंगल के रास्तों की स्थिति, प्राकृतिक जलभराव और अन्य संभावित जोखिमों को देखते हुए उद्यान प्रबंधन ने यह फैसला लिया था।
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आमतौर पर यहां जिप्सी सफारी की शुरुआत एक नवंबर से होती रही है, लेकिन इस बार मानसून की बारिश जल्दी समाप्त होने और मौसम अनुकूल रहने के कारण 20 अक्टूबर से ही पर्यटन गतिविधियां शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
करीब चार महीने बाद गुफा तक पहुंचने का रास्ता खुलने से पर्यटकों को बस्तर की इस प्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहर को देखने का मौका मिलेगा।
जिप्सी सफारी में जंगल का रोमांच, करीब से देख सकेंगे प्राकृतिक सुंदरता
कुटुमसर गुफा तक पहुंचने के लिए जिप्सी सफारी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख हिस्सा है। घने जंगलों के बीच से गुजरने वाला यह सफर प्रकृति प्रेमियों को बस्तर की हरियाली, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और समृद्ध जैव विविधता को करीब से देखने का अवसर देता है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्राकृतिक संपदा और विविध वनस्पतियों के लिए जाना जाता है। सफारी सेवा शुरू होने के बाद यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय गाइड, वाहन संचालकों और पर्यटन से जुड़े दूसरे व्यवसायों को भी फायदा मिल सकता है।
हजारों साल में बनी गुफा की संरचनाएं हैं खास आकर्षण
कांगेर घाटी के घने जंगलों के बीच स्थित कुटुमसर गुफा अपनी विशिष्ट भूगर्भीय संरचनाओं और चूना-पत्थर से बनी प्राकृतिक आकृतियों के लिए प्रसिद्ध है। गुफा के भीतर समय के साथ विकसित हुई प्राकृतिक संरचनाएं पर्यटकों और शोधार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती हैं।
यहां की अनूठी बनावट और प्राकृतिक वातावरण इसे बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी और पर्यटक इस गुफा को देखने पहुंचते हैं।
गुफा के खुलने से पर्यटन के शौकीनों को एक बार फिर इस प्राकृतिक धरोहर का दीदार करने का अवसर मिलेगा।
पर्यटकों की सुरक्षा और प्रकृति संरक्षण पर रहेगा जोर
उद्यान प्रबंधन के अनुसार, जिप्सी सफारी का संचालन मौसम, रास्तों की स्थिति और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना सभी पर्यटकों के लिए जरूरी होगा।
प्रबंधन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे जंगल और गुफा परिसर में स्वच्छता बनाए रखें। प्लास्टिक या अन्य कचरा न फैलाएं और वन्यजीवों को किसी भी तरह परेशान न करें। प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचना भी जरूरी है।
बस्तर के पर्यटन सीजन को मिलेगी नई रफ्तार
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक गौतम नारायण पडिभार के अनुसार, कुटुमसर गुफा में पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू होने से बस्तर के पर्यटन सीजन को गति मिलने की उम्मीद है।
20 अक्टूबर से गुफा तक जिप्सी सफारी शुरू होने के साथ पर्यटक फिर से कांगेर घाटी के जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकेंगे। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मजबूत होने की संभावना है।
पर्यटकों के लिए सलाह: कुटुमसर गुफा की यात्रा पर जाने से पहले सफारी के संचालन, प्रवेश की अनुमति, समय और बुकिंग से संबंधित नवीनतम जानकारी उद्यान प्रबंधन से जरूर प्राप्त कर लें।