मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में मुंबई और दिल्ली पुलिस की जांच में हथियारों की सप्लाई को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल और 20 कारतूस पंजाब के अमृतसर से जुटाए गए थे। इन्हें दिल्ली के रास्ते मुंबई पहुंचाने के लिए दो महिलाओं को कथित तौर पर 10 से 12 हजार रुपये देने का लालच दिया गया था। इस मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है, जबकि दो अन्य लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है।


अमृतसर से जुटाए गए थे हथियार और कारतूस
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जांच के मुताबिक, हथियारों की सप्लाई के लिए कथित तौर पर 'डेड लेटर बॉक्स' तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके में हथियार या अन्य सामान किसी तय गुप्त स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से दूसरा व्यक्ति उसे उठा लेता है। इससे दोनों के बीच सीधे संपर्क की जरूरत नहीं पड़ती।
पुलिस के अनुसार, विदेश में बैठे बताए जा रहे अनिल पंडित के निर्देश पर सोनीपत निवासी कुणाल और सुमित अमृतसर पहुंचे थे। वहां से उन्होंने एक पिस्टल और 20 कारतूस हासिल किए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस काम के लिए दोनों को 70 से 80 हजार रुपये दिए गए थे। जांच एजेंसियां हथियारों की सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

10 से 12 हजार रुपये के लालच में हथियार मुंबई पहुंचाने का आरोप
पुलिस की जांच में राधा और बबीता नाम की दो महिलाओं की भूमिका भी सामने आई है। दोनों उत्तर प्रदेश की रहने वाली बताई जा रही हैं और सोनीपत की एक औद्योगिक फैक्ट्री में काम करती थीं।

जांच के अनुसार, कुणाल ने दोनों को पिस्टल मुंबई पहुंचाने के लिए कथित तौर पर 10 से 12 हजार रुपये देने का प्रस्ताव दिया था। 15 अक्टूबर को वह उन्हें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा और पिस्टल को राधा के बैग में रखकर ट्रेन से मुंबई रवाना कर दिया।
सफर के दौरान कुणाल कथित तौर पर एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए अनिल पंडित के संपर्क में था। पुलिस अब इस बातचीत और हथियारों की डिलीवरी से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

दादर के होटल में नाबालिग को सौंपा गया बैग
पुलिस के मुताबिक, 17 अक्टूबर को राधा और बबीता मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन पहुंचीं और पास के एक होटल में ठहरीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक अज्ञात नाबालिग लड़का होटल पहुंचा और राधा से हथियारों वाला बैग लेकर चला गया।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी पिस्टल का इस्तेमाल 18 अक्टूबर की शाम जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग में किया गया। हालांकि, बैग लेने वाले लड़के की पहचान और इस मामले में उसकी सटीक भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

फायरिंग के बाद शूटरों को बाहर निकालने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे फायरिंग की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने शहर में नाकेबंदी और तलाशी अभियान तेज कर दिया था। इसके बाद कथित तौर पर अनिल पंडित ने कुणाल से संपर्क कर शूटरों को मुंबई से बाहर निकालने की जिम्मेदारी सौंपी।

उधर, हथियार पहुंचाने के आरोपी राधा और बबीता उसी दिन दादर से हरिद्वार की ओर जाने वाली ट्रेन में सवार हो गई थीं। दिल्ली पुलिस ने तकनीकी निगरानी के आधार पर दोनों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। कुणाल और सुमित को सोनीपत से पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है। मुंबई पुलिस ने चारों आरोपियों का तीन दिन का ट्रांजिट रिमांड हासिल किया है।

शूटर रेहान की मां ने अमन पर लगाए गंभीर आरोप
मामले में कोटा से पकड़े गए हरियाणा निवासी रेहान की मां शमशीदा ने अमन नाम के व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि गोहाना का रहने वाला अमन स्थानीय स्तर पर इस नेटवर्क को संचालित करता था और विदेश में बैठे अनिल पंडित के निर्देशों पर काम करता था।

शमशीदा के अनुसार, अमन कथित तौर पर कम उम्र के गरीब लड़कों को अपने जाल में फंसाता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेहान को पहले एक पुराने अवैध हथियार मामले में फंसाया गया था और जमानत कराने के बहाने परिवार से पैसे लिए गए थे। ये आरोप फिलहाल परिवार के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

बिहार के ऋतिक की भूमिका की भी जांच
इस मामले में गिरफ्तार बताए जा रहे दूसरे शूटर ऋतिक कुमार उर्फ रोशन की पृष्ठभूमि भी चर्चा में है। वह बिहार के बेगूसराय का रहने वाला बताया जा रहा है। उसके पिता छोटी लिट्टी-चोखा की दुकान चलाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, ऋतिक करीब दो साल पहले बेहतर रोजगार की तलाश में मुंबई गया था और एक रेस्टोरेंट में काम करने लगा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह कथित तौर पर अपराधियों के संपर्क में कैसे आया और फायरिंग की घटना में उसकी क्या भूमिका थी।

छह गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच एजेंसियां हथियारों की सप्लाई, कथित वित्तीय लेनदेन, आरोपियों के बीच संपर्क और शूटरों की मदद करने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का फोकस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों तक पहुंचने पर है।

हालांकि, मामले में सामने आए कई आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। कथित गैंग कनेक्शन, साजिश में शामिल लोगों की भूमिका और फायरिंग के पीछे की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
Published By- | 22-Oct-2026 09:57:00 am