23 अक्टूबर 2026 को आयोजित इन शिविरों का उद्देश्य वनांचल के लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने की परेशानी से राहत दिलाना और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के साथ पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना रहा।
मोबाइल मेडिकल यूनिट से गांव में ही हुई स्वास्थ्य जांच
शंकरगढ़ विकासखंड के पीएम जनमन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पोड़ीखुर्द स्थित आमाकोना बहुउद्देशीय केंद्र में मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान लोगों का ब्लड प्रेशर मापा गया, ब्लड शुगर की जांच हुई और जरूरत के अनुसार आगे की जांच के लिए रक्त के नमूने भी लिए गए।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान लोगों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार और जरूरी परामर्श दिया गया। गांव में सुविधा मिलने से ग्रामीणों को अस्पताल तक आने-जाने में लगने वाले समय और दूरी से राहत मिली।
शिविर में 42 महिलाएं और 30 बच्चे हुए शामिल
आमाकोना में आयोजित शिविर में 42 महिलाओं और 30 बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों की ऊंचाई और वजन मापकर उनकी पोषण स्थिति का आकलन किया गया। साथ ही अभिभावकों को बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास, संतुलित आहार और उचित देखभाल के संबंध में जानकारी दी गई।
शिविर के दौरान पूरक पोषण आहार के लिए पात्र 15 हितग्राहियों को सुपोषण किट भी वितरित की गई। इसके जरिए जरूरतमंद परिवारों को पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
कुपोषण से बचाव और मातृ स्वास्थ्य पर जागरूकता
शिविर में ग्रामीणों को कुपोषण के कारणों, उसकी रोकथाम और संतुलित भोजन के महत्व के बारे में बताया गया। गर्भवती महिलाओं को मातृ पोषण तथा शिशुवती माताओं को बच्चों के उचित आहार और देखभाल से जुड़ी जानकारी दी गई।
इसके अलावा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया, ताकि बच्चों के शुरुआती विकास के दौरान उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
चंपानगर में भी ग्रामीणों को मिली स्वास्थ्य सुविधाएं
कुसमी विकासखंड के बहुउद्देशीय केंद्र चंपानगर में भी स्वास्थ्य एवं पोषण शिविर आयोजित किया गया। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने का प्रयास किया गया।
स्वास्थ्य एवं पोषण सेवा संगम की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ कुपोषण की रोकथाम और बेहतर मातृ-शिशु देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।