रांची। झारखंड के स्वास्थ्य विभाग की ओर से लंबे समय से अनुपस्थित बताए गए 631 डॉक्टरों की सूची जारी किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि सूची में कुछ ऐसे डॉक्टरों के नाम भी शामिल होने की बात सामने आई है, जो नियमित रूप से अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बुंडू अनुमंडलीय अस्पताल में पदस्थापित डॉ. शोभा टोप्पो का मामला भी इसी विवाद से जुड़ा है। विभाग की सूची में नाम आने के बाद उन्होंने अपनी सेवा से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट करने की पहल की है।

अस्पताल में ड्यूटी, फिर भी अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची में नाम
स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को विज्ञापन प्रकाशित कर 631 डॉक्टरों के लंबे समय से अनुपस्थित रहने या नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं करने का मामला सार्वजनिक किया था। इसके बाद सूची में दर्ज कुछ नामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बुंडू अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत डॉ. शोभा टोप्पो भी इस सूची में शामिल हैं। बताया गया है कि वह अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रही हैं, इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें अनुपस्थित डॉक्टरों की श्रेणी में रखा गया है।

इस घटनाक्रम ने विभागीय रिकॉर्ड के रखरखाव और डॉक्टरों की सेवा संबंधी जानकारी के सत्यापन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2009 में नियुक्त डॉ. शोभा टोप्पो ने पेश किए सेवा के दस्तावेज
स्वास्थ्य विभाग को दिए गए आवेदन में डॉ. शोभा टोप्पो ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2009 में हुई थी। विभागीय आदेशों के अनुसार, समय-समय पर उनकी पदस्थापना अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में की गई।

आवेदन के मुताबिक, वह वर्तमान में बुंडू अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत हैं और 26 अक्टूबर 2026 तक लगातार सेवा देने की जानकारी दी गई है। सूची में अपना नाम आने के बाद उन्होंने विभाग को अपनी कार्यरत स्थिति से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं।

अब विभाग के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि नियमित रूप से सेवा दे रहे डॉक्टर का नाम अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची में किस आधार पर शामिल हुआ।

2009 बैच के 308 डॉक्टर सूची में शामिल
विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अनुपस्थित या नियुक्ति के बाद योगदान नहीं देने के मामलों में वर्ष 2009 में नियुक्त डॉक्टरों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। इस वर्ष के 308 डॉक्टर सूची में दर्ज हैं।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अलग-अलग नियुक्ति वर्षों के डॉक्टरों की संख्या इस प्रकार है:

नियुक्ति वर्ष डॉक्टरों की संख्या
1988 1
1990 16
1997 2
2000 7
2009 308
2012 65
2013 38
2015 124
2020 37
2021 17
2023 16
कुल 631
इन आंकड़ों के अनुसार, सूची में शामिल डॉक्टरों की नियुक्ति वर्ष 1988 से 2023 के बीच हुई थी। हालांकि, सूची में नाम दर्ज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित डॉक्टर वास्तव में लंबे समय से अनुपस्थित रहे हैं। प्रत्येक मामले में नियुक्ति, कार्यभार ग्रहण करने और सेवा में बने रहने से जुड़े दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

पहले भी डॉक्टरों पर हो चुकी है कार्रवाई
झारखंड में नियुक्ति के बाद योगदान नहीं देने वाले या लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग पहले भी कार्रवाई कर चुका है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से नियुक्त 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। बताया गया था कि इन डॉक्टरों ने नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं किया था।

वर्तमान में 631 डॉक्टरों से जुड़े मामलों की समीक्षा और आगे की विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया चलने की जानकारी दी गई है। विभाग का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा खाली पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ करना बताया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने क्या कहा?
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के मुताबिक, सूची तैयार करने की प्रक्रिया में हुई त्रुटियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

मंत्री के बयान के अनुसार, विभाग चिह्नित डॉक्टरों के मामलों में आगे की कार्रवाई कर रहा है, ताकि रिक्त पदों पर नए डॉक्टरों की नियुक्ति की दिशा में तेजी लाई जा सके।

अब विभाग के सामने रिकॉर्ड सुधारने की चुनौती
631 डॉक्टरों की सूची सामने आने के बाद मामला केवल अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। यदि सूची में नियमित रूप से काम कर रहे डॉक्टरों के नाम भी शामिल हैं, तो विभाग को संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

डॉक्टरों की नियुक्ति, पदस्थापना, उपस्थिति और सेवा अवधि से जुड़े दस्तावेजों का मिलान इस विवाद को सुलझाने में अहम होगा। साथ ही, जिन मामलों में लंबे समय से अनुपस्थिति की पुष्टि होती है, उनमें नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष: झारखंड में 631 डॉक्टरों की सूची ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड सत्यापन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। डॉ. शोभा टोप्पो का मामला इस बात की जरूरत बताता है कि किसी भी डॉक्टर के खिलाफ अंतिम कार्रवाई से पहले उसके सेवा रिकॉर्ड की सही तरीके से जांच की जाए।
Published By- | 28-Oct-2026 11:26:00 am