मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया और कृषि क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
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360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था को पहले से अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए नए केंद्र खोले जा रहे हैं। इससे किसानों को धान बेचने के लिए दूर-दराज के केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होगी। साथ ही, मौजूदा खरीदी केंद्रों पर भीड़ और दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार का प्रयास है कि किसानों का समय और श्रम बचे तथा उपज बेचने की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो। मुख्यमंत्री ने संबंधित व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने और किसानों की सुविधा का ध्यान रखने पर जोर दिया।
किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती-किसानी पर निर्भर है। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, कृषि लागत कम करने और खेती के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।
दो वर्षों में 10 हजार करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कृषि विकास के लिए सिंचाई सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
इसके अलावा, राज्य की 1,500 पुरानी सिंचाई परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए करीब 2,800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से प्रदेश में लगभग 76 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंचाई का विस्तार होने से किसानों को खेती के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता मिलेगी और वर्षा पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
किसान क्रेडिट कार्ड से सस्ता कृषि ऋण मिलने का जिक्र
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसानों को खेती के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को कई बार महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था, जबकि अब पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के तहत शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा मिल रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री के अनुसार, खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
प्रगतिशील किसानों को मिला उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए प्रगतिशील किसानों को ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि किसान परंपरागत खेती के साथ आधुनिक तकनीक और नवाचारों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे किसानों का सम्मान अन्य कृषकों को भी उन्नत कृषि पद्धतियां अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।
मनहरण लाल पाण्डेय के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन जनसेवा और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित रहा। उन्होंने खेती-किसानी और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में उनके योगदान का उल्लेख किया तथा उनकी स्मृति में आयोजित सम्मान समारोह की सराहना की।
कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने भी संबोधित किया। उन्होंने मनहरण लाल पाण्डेय के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कदम उठा रही है।
समारोह में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, स्मृति संस्थान के सदस्य और प्रदेशभर से आए किसान उपस्थित रहे।
किसानों के लिए क्या हैं प्रमुख घोषणाएं?
15 नवंबर से धान खरीदी: खरीफ विपणन व्यवस्था के तहत धान खरीदी शुरू करने की तैयारी।
360 नए खरीदी केंद्र: किसानों को नजदीक में उपज बेचने की सुविधा देने का लक्ष्य।
लगभग ₹10,000 करोड़: दो वर्षों में नई सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत।
₹2,800 करोड़: 1,500 पुरानी सिंचाई परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत राशि।
76 हजार हेक्टेयर: सिंचित क्षेत्र में प्रस्तावित वृद्धि।
निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ सरकार धान खरीदी केंद्रों के विस्तार और सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से किसानों की सुविधा बढ़ाने पर जोर दे रही है। अब इन योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक कितनी तेजी से पहुंचता है, यह खरीदी व्यवस्था की तैयारियों और सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।