बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस के गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि जेडीएस ने एक सीट अपने नाम की। कांग्रेस को चारों निर्वाचन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा।


इन नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। खास तौर पर बैलेट पेपर से हुए मतदान में कांग्रेस की हार को लेकर भाजपा और जेडीएस नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा है। जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने भी राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कांग्रेस के चुनाव संबंधी रुख पर सवाल उठाए।
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चार सीटों पर NDA का कब्जा, कांग्रेस को नहीं मिली सफलता
कर्नाटक विधान परिषद की इन चार सीटों में दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। चुनाव में भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, पश्चिम स्नातक और दक्षिण-पूर्व स्नातक सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीएस के उम्मीदवार एपी रंगनाथ विजयी रहे।

इस परिणाम से भाजपा-जेडीएस गठबंधन को राज्य में राजनीतिक बढ़त मिली है। खास बात यह रही कि बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की।

किस सीट पर किस उम्मीदवार ने दर्ज की जीत?
चारों निर्वाचन क्षेत्रों के उपलब्ध परिणाम इस प्रकार हैं:
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के शशिल जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को हराया। नमोशी को 15,596 वोट मिले, जबकि मत्तूर को 12,299 मत प्राप्त हुए। जीत का अंतर 3,297 वोट रहा।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को पराजित किया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट प्राप्त हुए। रंगनाथ ने 908 वोटों से जीत दर्ज की।

पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के एस.वी. संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई को हराया। संकनूर को 33,711 और लिंबिकाई को 24,388 वोट मिले। जीत का अंतर 9,323 मतों का रहा।

दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: भाजपा के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मठ को हराकर जीत हासिल की। इस सीट के मतों का विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।

इन नतीजों के साथ भाजपा ने तीन निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी जीत दर्ज की, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक सीट जीतकर गठबंधन की कुल संख्या चार तक पहुंचा दी।

बैलेट पेपर से मतदान, फिर कांग्रेस की हार पर सियासत
इन चुनावों में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा और जेडीएस के नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा।
कांग्रेस के नेता कई मौकों पर ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा चुके हैं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी करते रहे हैं। ऐसे में चारों सीटों पर गठबंधन की जीत के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

हालांकि, इन नतीजों को केवल मतदान प्रणाली के आधार पर किसी दल के दावों का निर्णायक प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। चुनाव परिणाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं के फैसले को दर्शाते हैं।

निखिल कुमारस्वामी का राहुल गांधी पर तंज
एनडीए की जीत के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद कांग्रेस की हार का हवाला देते हुए पार्टी पर कटाक्ष किया।

निखिल ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एपी रंगनाथ की जीत का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के चुनाव संबंधी आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने बयान में 'पेपर चोरी' का जिक्र करते हुए भी तंज कसा और जीत के लिए रंगनाथ समेत गठबंधन के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

उनकी टिप्पणी को कांग्रेस और एनडीए के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, यह निखिल कुमारस्वामी की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, न कि चुनावी प्रक्रिया पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष।

भाजपा ने कहा- शिक्षकों और स्नातकों ने अपना फैसला सुना दिया
भाजपा विधायक महेश तेंगिनकाई ने भी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए गठबंधन की जीत को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चारों सीटों पर भाजपा और एनडीए के उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है।

भाजपा नेताओं ने इन परिणामों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका बताते हुए राज्य में गठबंधन की स्थिति मजबूत होने का दावा किया। वहीं, कांग्रेस की ओर से इन नतीजों पर प्रतिक्रिया और हार की समीक्षा आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकती है।

कर्नाटक की राजनीति में क्या होगा असर?
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के कारण विधान परिषद की चार सीटों पर हार पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दूसरी ओर, भाजपा और जेडीएस के संयुक्त प्रदर्शन ने दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल को मजबूती दी है।

विशेष रूप से बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस की जीत गठबंधन के लिए अहम रही, क्योंकि यहां पार्टी ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी को हराया।

निष्कर्ष: कर्नाटक एमएलसी चुनाव में भाजपा-जेडीएस गठबंधन की चारों सीटों पर जीत ने कांग्रेस के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। बैलेट पेपर से मतदान के बावजूद कांग्रेस की हार को लेकर बयानबाजी तेज है, लेकिन इस परिणाम का व्यापक राजनीतिक असर आगामी चुनावों और राज्य में दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
Published By- | 28-Oct-2026 01:22:00 pm