राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और क्षेत्रीय कलाओं को प्रमुखता दी जाएगी। संस्कृति विभाग के अनुसार, मुख्य मंच पर प्रतिदिन शाम 6 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।
पहले दिन अनुराग शर्मा की आवाज से होगी शुरुआत
राज्योत्सव के पहले दिन, 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक अनुराग शर्मा मुख्य मंच पर प्रस्तुति देंगे। उनके कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोकधुनों के साथ सूफी संगीत और मिट्टी की खुशबू से जुड़े गीतों का रंग देखने को मिलेगा।
इसके अलावा पहले दिन विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर लोकगीत-संगीत, गिटार वादन, शास्त्रीय नृत्य, लोकमंच और पंडवानी की प्रस्तुतियां भी होंगी। शिवेंद्र मंडावी, रिदम लाइव बैंड के राजीव तिवारी और चेतन देवांगन, अनुष्का सुल्ताना, रजनी रजक, वंदिता साहू, पायल साहू और दुर्गा साहू सहित कई कलाकार कार्यक्रम में शामिल होंगे।
2 नवंबर को सुनील सोनी जमाएंगे रंग
राज्योत्सव के दूसरे दिन, 2 नवंबर को छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी मुख्य मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे। अपने लोकप्रिय और जोशीले गीतों के जरिए वे सांस्कृतिक संध्या को खास बनाएंगे।
दूसरे दिन के अन्य कार्यक्रमों में ओडिशी और कथक नृत्य, सुआ नृत्य, सूफी संगीत, लोकगीत और लोकमंच की प्रस्तुतियां शामिल हैं। प्रसन्ना अवस्थी, सुषमा दास, अंकित निर्मलकर, मिलवंतीन बाई व साथी, मेघा घोष, आंचल पाण्डेय, रुखमणि दीवान, आदित्य मिश्रा और तेजराम साहू भी विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देंगे।
समापन दिवस पर ऊषा बारले की लोक प्रस्तुतियां
3 नवंबर को राज्योत्सव के समापन दिवस पर पद्मश्री सम्मानित लोक गायिका ऊषा बारले अपनी प्रस्तुति देंगी। पंथी गायन और पारंपरिक लोक संगीत के लिए पहचानी जाने वाली ऊषा बारले की प्रस्तुति कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगी।
समापन दिवस पर भजन गायन, पंथी नृत्य, आदिवासी लोक संगीत, सूफी संगीत और नाटक मंचन भी आयोजित किए जाएंगे। आस्था भट्ट, आरती बारले, राकेश सेन, दिनेश जांगड़े, अभिषेक सोनकर, सीवी वाचस्पति भारती और आनंद कुमार पांडे सहित कई कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
दूसरे राज्यों की लोक संस्कृति भी आएगी नजर
राज्योत्सव में केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को भी मंच मिलेगा। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र से जुड़े महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और गोवा के कलाकार अपने-अपने राज्यों की पारंपरिक कला और लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेंगे।
इससे दर्शकों को अलग-अलग क्षेत्रों के लोकनृत्य, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
तीन दिनों में 120 कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
राज्योत्सव के मुख्य मंच के अलावा अन्य सांस्कृतिक मंचों पर भी कार्यक्रमों की शृंखला चलेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 120 लोक कलाकारों की भागीदारी के साथ प्रतिदिन लगभग 10 प्रस्तुतियां आयोजित करने की योजना है।
कार्यक्रमों में पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य, आदिवासी नृत्य-संगीत, भरथरी, सूफी गजल, नाटक और लोकमंच जैसी विधाओं को शामिल किया गया है।
लोक कला और संगीत का बनेगा बड़ा मंच
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और कलाकारों की प्रतिभा को व्यापक मंच देने की तैयारी है। तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में मुख्य गायकों के कार्यक्रमों के साथ स्थानीय और अन्य राज्यों से आने वाले कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।