Israel Election Results: 120 सीटों वाली संसद में बहुमत का गणित
इजराइल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। चुनाव के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू समर्थक दलों को 53 सीटें मिलने का अनुमान है।
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दूसरी ओर, यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के खाते में 48 सीटें और अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के हिस्से में 19 सीटें जाती दिख रही हैं। इन दोनों समूहों की सीटें जोड़ने पर विपक्षी खेमे का आंकड़ा 67 तक पहुंच जाता है।
हालांकि, सीटों की संख्या बहुमत के लिए पर्याप्त दिखाई देने के बावजूद विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी सहमति बनाना है। अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने को लेकर सभी विपक्षी दल एकमत नहीं हैं। यदि यह मतभेद दूर नहीं होता, तो नेतन्याहू विरोधी खेमे के लिए सरकार बनाने का रास्ता मुश्किल हो सकता है।
Arab Parties Kingmaker: क्या 19 सीटें तय करेंगी इजराइल की सत्ता?
इजराइल की राजनीति में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। शुरुआती आंकड़ों में 19 सीटों का अनुमान उन्हें सरकार गठन के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थिति में रखता है।
यदि यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दल अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करने में सफल रहते हैं, तो नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की संभावना मजबूत हो सकती है। लेकिन गठबंधन में उनकी भागीदारी को लेकर राजनीतिक और वैचारिक मतभेद बड़ी बाधा बने हुए हैं।
यही वजह है कि चुनाव के बाद सत्ता का मुकाबला केवल सीटों तक सीमित नहीं है। असली चुनौती अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को साझा कार्यक्रम पर एक साथ लाने की होगी।
Israel Protest: यहूदी-अरब साझा सरकार की मांग तेज
चुनावी नतीजों के बीच इजराइल के कई शहरों में यहूदी और अरब समुदायों की साझा सरकार बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 300 प्रदर्शनकारी यरुशलम के पेरिस स्क्वायर, तेल अवीव के मेसिला पार्क और हाइफा के यूनेस्को स्क्वायर में एकत्र हुए।
प्रदर्शनकारियों ने समान अधिकार, स्वतंत्रता और साझा राजनीतिक भागीदारी के समर्थन में बैनर दिखाए। उनका कहना है कि देश में ऐसी सरकार बननी चाहिए, जिसमें यहूदी और अरब समुदायों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
इन प्रदर्शनों के बीच यह मुद्दा और अहम हो गया है कि क्या विपक्षी नेता राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़कर अरब पार्टियों के साथ सहयोग का रास्ता चुनेंगे।
Gadi Eisenkot: सत्ता परिवर्तन की कोशिश जारी रखने का ऐलान
प्रमुख विपक्षी नेता और यशर पार्टी के अध्यक्ष गादी आइजेनकोट ने चुनावी नतीजों को नेतन्याहू सरकार के प्रति जनता के असंतोष से जोड़कर देखा है। उन्होंने संकेत दिया कि संसदीय बहुमत हासिल करने में कठिनाई आने के बावजूद सत्ता परिवर्तन की कोशिशें जारी रहेंगी।
आइजेनकोट ने ऐसी सरकार बनाने की जरूरत पर जोर दिया, जो सैन्य भर्ती के मुद्दे पर स्पष्ट प्रतिबद्धता रखती हो। उनका रुख बताता है कि विपक्ष के भीतर सरकार गठन के साथ-साथ नीतिगत मुद्दे भी अहम बने हुए हैं।
विपक्ष के लिए चुनौती केवल 61 सांसदों का समर्थन जुटाना नहीं, बल्कि उन सभी दलों के बीच सहमति बनाना भी है, जिनकी प्राथमिकताएं और राजनीतिक दृष्टिकोण अलग-अलग हैं।
Yair Golan: अरब पार्टियों के साथ गठबंधन के पक्ष में
वामपंथी दल डेमोक्रेट्स के अध्यक्ष यायर गोलान अरब पार्टियों के साथ सहयोग करने के समर्थक नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत आगे बढ़ाने की तैयारी जताई है।
गोलान का मानना है कि नेतन्याहू विरोधी दलों को साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अरब पार्टियों को गठबंधन में शामिल करने का उनका समर्थन विपक्ष के भीतर जारी बहस को भी उजागर करता है।
यदि गोलान और अन्य नेता गठबंधन के पक्ष में सहमति बनाने में कामयाब होते हैं, तो सरकार गठन के समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी दल अरब पार्टियों के समर्थन को किस रूप में स्वीकार करते हैं।
Israel Government Formation: अंतिम मतगणना से बदल सकता है पूरा समीकरण
इजराइल में सरकार गठन की तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। शुरुआती आंकड़ों में कुछ दल चुनावी सीमा से नीचे बताए जा रहे हैं, जबकि सैनिकों और अन्य विशेष श्रेणियों के मतों की गिनती से भी सीटों के अंतिम आंकड़े प्रभावित हो सकते हैं।
इजराइल की चुनाव प्रणाली में किसी पार्टी को संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए निर्धारित न्यूनतम मत प्रतिशत हासिल करना होता है। इसलिए अंतिम नतीजे आने तक किसी भी गठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह निश्चित नहीं माना जा सकता।
यदि सीटों का मौजूदा अनुमान बरकरार रहता है, तो विपक्ष के सामने अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर फैसला लेना सबसे अहम होगा। वहीं, नेतन्याहू समर्थक दल भी सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं।
क्या नेतन्याहू की सत्ता पर मंडरा रहा है खतरा?
मौजूदा चुनावी गणित नेतन्याहू के लिए चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है, लेकिन विपक्ष की संभावित 67 सीटें अपने आप में सरकार बनाने की गारंटी नहीं हैं। इसके लिए दलों के बीच औपचारिक समझौता और पर्याप्त संसदीय समर्थन जरूरी होगा।
निष्कर्ष: इजराइल के चुनावी नतीजों में नेतन्याहू समर्थक खेमे को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विरोधी दलों का संयुक्त आंकड़ा 67 तक पहुंच रहा है। इसके बावजूद अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद विपक्ष की राह रोक सकते हैं। अब सबकी नजर अंतिम नतीजों और राजनीतिक बातचीत पर है। यही तय करेगा कि इजराइल में सत्ता परिवर्तन की संभावना मजबूत होगी या नेतन्याहू एक बार फिर सरकार बनाने में सफल रहेंगे।