उन्होंने बताया कि राज्य में नागरिक-केंद्रित सेवाओं का विस्तार, डिजिटल अधोसंरचना को मजबूत करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और तकनीक आधारित प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे लोगों को सरकारी सेवाएं पहले से अधिक आसान और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो रही हैं।
सेवा सेतु बना सबसे बड़ा डिजिटल नागरिक सेवा मंच
विभाग के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सेवा सेतु के उन्नत संस्करण का शुभारंभ किया था। वर्तमान में इस पोर्टल पर 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध हैं। पिछले ढाई वर्षों में 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 78 लाख से ज्यादा आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है।
राशन कार्ड, विवाह पंजीयन, नल कनेक्शन सहित कई सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। पोर्टल पर डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित वेरिफिकेशन, एसएमएस और व्हाट्सएप अलर्ट तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही डिजिटल कनेक्टिविटी
राज्य सरकार डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का विस्तार कर रही है। विभाग ने बताया कि जनवरी 2024 से अब तक 1,273 मोबाइल टावर शुरू किए जा चुके हैं।
इसके अलावा भारतनेट फेज-III के तहत ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने ₹3,928 करोड़ की मंजूरी दी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का विस्तार होगा।
50 युवाओं को मिलेगा हाई-टेक प्रशिक्षण
राज्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सीएम आईटी फेलोशिप शुरू की गई है। अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नया रायपुर के सहयोग से संचालित इस योजना के तहत 50 स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण के साथ विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यानुभव दिया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत हो रहा सुशासन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि विभाग द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बना रहे हैं। खनिज ऑनलाइन 2.0 के माध्यम से जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ₹30,311.80 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 में 19 विभागों की 151 सेवाओं को एकीकृत कर निवेशकों को ऑनलाइन मंजूरी की सुविधा दी जा रही है।
इसके अलावा पारस पोर्टल, बस्तर मुन्ने पोर्टल, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (IWMMS) और डिजिटल द्वार जैसे प्लेटफॉर्म भी शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना रहे हैं।
AI और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विभाग ने छत्तीसगढ़ AI मिशन (CG-AIM) शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत युवाओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप और सरकारी अधिकारियों के लिए AI आधारित कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही राज्य में AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और AI डेटा लैब स्थापित की जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के बीच ₹105.3 करोड़ की लागत से चार सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप स्थापित करने के लिए एमओयू किया गया है। इन केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेडटेक, स्मार्ट सिटी और स्मार्ट कृषि जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
क्लाउड फर्स्ट नीति होगी लागू
राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत बनाने के लिए क्लाउड फर्स्ट नीति लागू कर रही है। इससे सुरक्षित क्लाउड सेवाओं, डेटा सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
विभाग की कई डिजिटल परियोजनाओं को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सम्मान मिल चुका है। इनमें आधार सेवाएं, जीआईएस परियोजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-प्रगति पोर्टल, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली, वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और कोर्ट केस मॉनिटरिंग सिस्टम प्रमुख हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में विभाग के सचिव अंकित आनंद ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक को केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सशक्तिकरण का आधार मानते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ लगातार कार्य कर रही है।