- बोले- प्रधान का ऐसे स्वागत हुआ जैसे पाकिस्तान से लड़कर आये हैं
नई दिल्ली। लोकसभा में पीएमओ में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश कर दिया है. अब इस बिल पर चर्चा चल रही है. आज लोकसभा में इस बिल पर 10 घंटे चर्चा होनी है. सबसे पहले सरकार की तरफ से जितेंद्र सिंह ने बिल पेश करते हुए कहा कि, पहले भी परीक्षा पत्र लीक होते रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस सरकार में हुए पेपर लीक के आंकड़ें सदन के सामने रखे. साथ ही पेपर लीक बिल में किये गए संशोधन को भी सदन को बताया. वहीं जितेंद्र सिंह के जवाब में कांग्रेस की तरफ से असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी.
गोगोई ने बिल पर बोलते हुए कहा कि इस बिल से साफ पता चल जाता है कि सरकार सुधार नहीं लाना चाहती. ये बिल सिर्फ दिखावे का बिल है. क्योंकि ये सिर्फ एक संशोधन बिल है. दो साल पहले ये बिल लाते समय भी ऐसे ही दावे किए गए थे. 2026 में एक अखबार में आर्टिकल आया कि 2024 नीट पेपर लीक में चार्जशीटेड हुए 46 में से 44 को बेल मिल चुकी है. संजीव मुखिया 11 महीने फरार था, जिसे मास्टरमाइंड कहा जाता है. गिरफ्तार हुआ, तो उसे उस मामले में बेल मिल गया. एक दूसरे व्यक्ति अमित कुमार बरुआ, अमित कुमार सिंह को बेल मिल गया. उन्होंने एक-एक आरोपी के नाम लेकर बेल वाली लिस्ट गिनाई और कहा कि ये कानून उस समय भी विफल था, जिस मंशा से आज ला रहे हैं आज भी विफल होगा. ये कानून आपकी विफलता का स्मारक है.
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गौरव गोगोई ने कहा कि व्यापक चर्चा की बजाय प्रधानमंत्री कहते हैं- इंस्टाग्राम पर और ध्यान दो. प्रधानमंत्री जब आते हैं, हाईपावर कमेटी के गठन की बात करते हैं, तो दो साल पहले राधाकृष्णन कमेटी का क्या हुआ. वास्तव में बढ़िया काम किया, तो दो साल बाद ही क्यों पेपर लीक हुआ. सरकार दिखाना चाहती है कि बहुत गंभीर है. एनटीए के 47 लोगों को बदला गया. कौन हैं वो, सरकार से ब्यौरा चाहूंगा. एनटीए की सैंक्शन कैपेसिटी है वो 34 है. ये 47 कौन हैं. 34 में से 10-12 वैकेंसियां हैं, 47 कौन हैं. एनटीए के डीजी को बदला, चेयरमैन को रखा. ऐसा क्यों.
एनटीए के चेयरमैन पर इतना विश्वास क्यों, उनका ब्यौरा देख लीजिए. एक विशेष संगठन से जुड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के भी चेयरमैन थे, वहां भी धांधली हुई. आपकी सरकार बचा रही है. आज भी वो चेयरमैन बचा हुआ है, क्योंकि वह एक विशेष संघ से जुड़ा हुआ है. शिक्षा विभाग में आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि आरएसएस के लिए शिक्षा विभाग बहुत महत्वपूर्ण विभाग है. इसीलिए वीसी से लेकर फैकल्टी में, यूनिवर्सिटीज में क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
धर्मेंद्र प्रधान एक सिंबल, पेनल्टी बढ़ाने से नहीं सुधरेगी शिक्षा- गौरव गोगोई
आप शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोगों को आने वाली चुनौतियों के लिए नहीं, अपने दल के लिए वोटर बनाने पर ध्यान दे रहे हो. दिल्ली जाने के लिए देशभर के माता-पिता प्रदर्शन करने के लिए भेज रहे हैं. एक मां ने आशीर्वाद के साथ जंतर-मंतर भेजा. जेएनयू, डीयू कहता है कि आप मत जाओ. ऐसे हम आने वाली चुनौतियों के लिए भारत का निर्माण करेंगे. एक बात पूरे घटनाक्रम से निकलती है, वो ये कि पेनल्टी पनिशमेंट बढ़ाने से शिक्षा नहीं सुधरेगी. धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक सिंबल है, उनके हटने से शिक्षा में सुधार आएगा, इस पर बच्चों को विश्वास नहीं. आज शिक्षा के विषय पर सभी दल-संगठन और इनसे अलग युवा सड़क पर आ गए. क्यों शिक्षा की मांग की, उनकी पीड़ा को समझना चाहिए.
किसी का इतना साहस नहीं कि भूख हड़ताल पर रहना, पुलिस की लाठी खाना. ये साहस आता है दर्द से, जिसमें भविष्य को लेकर वह विवश है. सरकार से सवाल भी नहीं पूछ सकते. एक व्यक्ति ने इस पूरे दर्द के बारे में बात करते हुए गोपालदास नीरज की बात की. ‘कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे…’ सुनाते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि आज देश की स्थिति ये है कि आत्महत्या हुई, क्योंकि बच्चा परीक्षा में फेल हो गया. छात्रों की आत्महत्या एक लाख से अधिक हो गई. दो हजार ने साफ कहा कि फेल हो गया. इसके बाद भी युवा आए.
लड़कियों पर अत्याचार, पैलेट गन का इस्तेमाल… हम भूलेंगे नहीं- गौरव गोगोई
गौरव गोगोई ने प्रोटेस्ट के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख किया और कहा कि डर गायब हो गया. लोग 20 जुलाई की रात 10 बजे प्रोटेस्ट में पहुंचे, कि मैं भी एक लाठी खा लूंगा. हमें आपने याद दिलाया कि लोकतंत्र है. खून से लथपथ चेहरे के बावजूद एक लड़का पुलिस को ललकार रहा था. बहुत लोग कहते हैं कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में गलत शब्द भी कहे गए. उन शब्दों का समर्थन नहीं कहा, लेकिन उन शब्दों को भी याद करना चाहिए जो उन बच्चों ने याद दिलाया. वसीम बरेलवी की कविता- उसूलों पर आंच आए, तो टकराना जरूरी है.
जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है. पुलिस की लाठी आती है, तो कोई अनजाना सामने आकर लड़की को बचाता है. वह लड़का कहता है कि इसी उंगली से हमने कमल को वोट डाला, आज कमल की पुलिस ने उस उंगली को तोड़ डाला. धन्यवाद देना चाहता हूं कि देशभर से लोगों ने स्विगी के जरिये खाना भिजवाया. वकीलों ने बोला कि लोकतंत्र के साथ यहां पर खड़े हैं. हमने लोकतंत्र की ताकत देखी, वहीं हमने इस सरकार की क्रूरता भी देखी. हमने देखा कि किस प्रकार से पैलेट गन का इस्तेमाल किया, हमने वह भी देखा कि किस तरह से पुलिसकर्मी ने लड़की के गाल पर थप्पड़ मारा. एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया. हम भूलेंगे नहीं. हम गृह मंत्री का जवाब चाहते हैं. यह बिल इसलिए आया है, क्योंकि आपकी पुलिस इस आंदोलन को कुचल नहीं पाई. बिहार में आपकी पुलिस ने एके-47 का इस्तेमाल किया.