नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बोलने के अधिकार, सदन की कार्यवाही और नियमों को लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि सदन में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

दरअसल, विपक्ष दिल्ली में कथित लाठीचार्ज के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा था। इसी दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से अनुरोध किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में बुलाकर इस मुद्दे पर जवाब देने के निर्देश दिए जाएं।

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खरगे ने कहा कि विपक्ष किसी भी चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन सरकार बहस से बच रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने केवल जनहित से जुड़े और उचित सवाल उठाए हैं तथा गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।

इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष का नेता यह तय नहीं कर सकता कि सदन में कौन-सा मंत्री आएगा। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी से केवल आग्रह किया जा सकता है, निर्देश नहीं दिए जा सकते।

रिजिजू की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने कहा, "क्या बोलना, कब बोलना है और कैसे बोलना है, यह तय करना मेरा अधिकार है।" उन्होंने दोहराया कि विपक्ष केवल जवाबदेही की मांग कर रहा है।

इसके जवाब में किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के नेता ने किसी नियम का हवाला नहीं दिया और चेयर को निर्देश देने का अधिकार किसी सदस्य के पास नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नए सांसदों को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं देती।

राज्यसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबे समय तक बहस और हंगामा चलता रहा, जिसके चलते सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। 
Published By- | 01-Aug-2026 02:24:00 am