वन विभाग के मुताबिक, वर्तमान में धरमजयगढ़ वन मंडल में कुल 124 हाथी मौजूद हैं। इनमें 35 नर, 57 मादा और 32 शावक शामिल हैं। सबसे बड़ा 51 हाथियों का दल लैलूंगा रेंज के तीन अलग-अलग बीटों में सक्रिय है। इसके अलावा कापू रेंज में 29, बोरो रेंज में 23, धरमजयगढ़ रेंज में 15, छाल रेंज में 5 और बाकारूमा क्षेत्र में 1 हाथी विचरण कर रहा है।
बारिश के मौसम में धान की फसलें तैयार होने के कारण हाथी भोजन की तलाश में जंगल से निकलकर गांवों की ओर पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कई बार मकानों और अन्य संपत्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। लगातार बढ़ रही घटनाओं से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में भय का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की आवाजाही के कारण हर समय जान-माल का खतरा बना हुआ है। खेतों में काम करने और रात के समय बाहर निकलने में लोग डर महसूस कर रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने हाथी प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। वनकर्मियों के साथ हाथी मित्र दल लगातार गांव-गांव जाकर मुनादी कर रहा है और लोगों को हाथियों की गतिविधियों की जानकारी दे रहा है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात में अकेले खेत या जंगल की ओर न जाएं, हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और कहीं भी हाथी दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
वन विभाग का कहना है कि प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए नुकसान का सर्वेक्षण जारी है।