स्कूल पहुंचते ही शुरू हुआ विरोध
जानकारी के मुताबिक, CJP की टीम राजकीय प्राथमिक स्कूल की स्थिति का जायजा लेने रामपुरा-कंवरपुरा पहुंची थी। टीम के स्कूल पहुंचते ही कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और कार्यकर्ताओं को परिसर से बाहर जाने के लिए कहा। विवाद बढ़ने के बाद CJP टीम को वहां से हटना पड़ा।
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद BJP से जुड़े लोगों ने कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। उन्होंने एक वॉलंटियर के हाथ में चोट लगने, महिला कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन तोड़े जाने और पथराव किए जाने का दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, ग्रामीण जुगल किशोर शर्मा ने CJP टीम के साथ मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि गांव के लोगों ने टीम के साथ मारपीट नहीं की। उन्होंने दावा किया कि CJP टीम बड़ी संख्या में लोगों के साथ गांव पहुंची थी, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया।
ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल में मरम्मत का काम स्थानीय विधायक की ओर से कराया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए करीब 12 लाख रुपये की राशि तय होने का भी दावा किया गया है।
आशुतोष रांका ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
घटना के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने BJP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कथित हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी और संबंधित आदेश को वापस लेने की मांग की है। रांका ने इसके लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने की बात कही है।
CJP का कहना है कि संगठन सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए निरीक्षण अभियान चला रहा है। संगठन के मुताबिक, उसे राजस्थान के कई जिलों से सरकारी स्कूलों का जायजा लेने के लिए अनुरोध मिले हैं।
स्कूल की बदहाली पर भी उठे सवाल
CJP ने रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आशुतोष रांका का दावा है कि स्कूल लंबे समय से भवन और शैक्षणिक सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में मरम्मत का काम कराया जाना है और स्थानीय स्तर पर इसकी तैयारी चल रही है।
सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर नया आदेश
यह विवाद राजस्थान शिक्षा विभाग के उस हालिया आदेश के बाद सामने आया है, जिसमें सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश के लिए अनुमति लेने की व्यवस्था की गई है। आदेश में विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल की गतिविधियों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।
सरकार ने इन नियमों के पीछे विद्यार्थियों की निजता और सुरक्षा का हवाला दिया है। हालांकि, विपक्ष और CJP ने इन पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।
BJP नेताओं ने ग्रामीणों के विरोध का किया बचाव
घटना के बाद BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य और गोपाल शर्मा ने ग्रामीणों के विरोध का बचाव किया। बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि ग्रामीण नहीं चाहते कि CJP की गतिविधियों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो। वहीं गोपाल शर्मा ने भी CJP की भूमिका पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और रिकॉर्डिंग से जुड़े आदेश की आलोचना की। उन्होंने सरकार से स्कूलों की स्थिति सामने आने से रोकने के बजाय बुनियादी सुविधाओं में सुधार पर ध्यान देने की मांग की।
पुलिस व्यवस्था पर भी उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम में पुलिस व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार CJP टीम के स्कूल पहुंचने की सूचना पहले से दी गई थी, लेकिन टीम के पहुंचने के समय मौके पर पुलिस की व्यवस्था मौजूद नहीं थी। विवाद बढ़ने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
फिलहाल CJP और ग्रामीणों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। CJP ने BJP से जुड़े लोगों पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने मारपीट से इनकार किया है। पुलिस की जांच और दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।