याचिका में JPSC Combined Civil Services Preliminary Competitive Examination-2025 में कथित अनियमितताओं की जांच CBI या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की मांग की गई है। हालांकि, याचिका में सीधे तौर पर परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं की गई है। मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की है।
परीक्षा की पारदर्शिता पर उठे सवाल
JPSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से विवाद चल रहा है। अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
इसी बीच JPSC और JSSC की अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन भी तेज हुआ। राज्य सरकार ने कथित परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों के आंदोलन के बीच कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था।
इनमें JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत कुछ अन्य भर्ती परीक्षाएं भी शामिल थीं।
हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
इस विवाद में पिछले सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली, जिनकी नियुक्तियां रद्द होने का खतरा पैदा हो गया था।
अब JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।
नोटिस जारी होना परीक्षा रद्द होने का आदेश नहीं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने JPSC की परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया है। फिलहाल अदालत ने संबंधित पक्षों से याचिका में लगाए गए आरोपों और स्वतंत्र जांच की मांग पर जवाब मांगा है।
अब केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की दिशा तय करेगा।
अभ्यर्थियों की नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर
JPSC-JSSC विवाद में फिलहाल दो महत्वपूर्ण कानूनी मोर्चे सामने हैं। एक ओर हाईकोर्ट के आदेश से पूर्व नियुक्तियों को लेकर अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।