नई दिल्ली: पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते में ईरान को भी शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय या किसी अन्य आधिकारिक स्तर से इस दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ईरानी अधिकारी ने किया दावा

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ईरानी संसद की ‘खाना-ए-मिल्लत’ न्यूज एजेंसी के प्रमुख महदी रहीमी ने लेबनान के न्यूज चैनल ‘अल मयादीन’ से बातचीत में दावा किया कि ईरान को इस रक्षा व्यवस्था में शामिल होने का विकल्प दिया गया है।

उनके मुताबिक, तेहरान इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने इसे ईरान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया और कहा कि क्षेत्रीय देश अब साझा सुरक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

क्या है मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट?

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने 7 अगस्त को त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे ‘मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ कहा जा रहा है।

समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य आपसी रक्षा सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना बताया गया है।

तुर्की की ओर से पहले संकेत दिए जा चुके हैं कि भविष्य में अन्य देश भी इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं।

ईरान के शामिल होने से बदल सकता है समीकरण

अगर ईरान को वास्तव में इस रक्षा समझौते में शामिल होने का औपचारिक प्रस्ताव मिलता है और तेहरान इसे स्वीकार करता है, तो मध्य पूर्व की रणनीतिक राजनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

खास तौर पर सऊदी अरब और ईरान लंबे समय से क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों का एक ही सुरक्षा ढांचे में आना पश्चिम एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।

अमेरिका की भी है नजर

इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सकारात्मक प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया था।

वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अगर तेहरान इस तरह की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होता है, तो इसका असर मध्य पूर्व की कूटनीति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान को वास्तव में औपचारिक निमंत्रण मिला है और क्या तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा। यदि ऐसा होता है, तो सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और पाकिस्तान की एक साझा सुरक्षा व्यवस्था मिडिल ईस्ट के मौजूदा समीकरण को काफी हद तक बदल सकती है।
Published By- | 24-Aug-2026 03:25:00 pm