क्राइम ब्रांच ने देशभर से दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान ऐसे मोबाइल नंबरों और डिवाइस की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल बार-बार संदिग्ध साइबर गतिविधियों और ठगी के मामलों में किया जा रहा था।
NCRP की शिकायतों से मिले सुराग
पुलिस ने NCRP पर दर्ज शिकायतों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर संदिग्ध मोबाइल नंबरों को चिन्हित किया। जांच में सामने आया कि कुछ नंबरों और मोबाइल डिवाइस का उपयोग अलग-अलग साइबर ठगी की घटनाओं में किया जा रहा था।
इसके बाद क्राइम ब्रांच ने संबंधित दूरसंचार एजेंसियों से संपर्क कर इन नंबरों और डिवाइस पर कार्रवाई कराई।
80 सिम कार्ड किए गए बंद
जांच के दौरान संदिग्ध पाए गए कुल 80 सिम कार्ड बंद कराए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग लोगों को फर्जी कॉल करने, संदिग्ध लिंक भेजने और अलग-अलग तरीकों से धोखाधड़ी का शिकार बनाने के लिए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं।
अपराधी अक्सर बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी या सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। इसके अलावा KYC अपडेट, नौकरी, लोन, निवेश, इनाम और अन्य आकर्षक ऑफर के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाया जाता है।
15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी ब्लॉक
क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी ब्लॉक कराए हैं। IMEI मोबाइल फोन की एक विशेष डिजिटल पहचान होती है, जिसके माध्यम से डिवाइस की पहचान की जा सकती है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ऐसे संदिग्ध मोबाइल डिवाइस को नेटवर्क पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। इससे साइबर ठगों के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी जांच के आधार पर आगे भी होगी कार्रवाई
इंदौर क्राइम ब्रांच का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में लगातार तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। संदिग्ध मोबाइल नंबरों, डिवाइस और अन्य डिजिटल माध्यमों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, फर्जी लिंक या संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा न करें। साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।