कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई से केवल एक इमारत नहीं गिरी, बल्कि इससे लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। उन्होंने पूरे मामले में न्याय की मांग की है।
‘एक झटके में पूरा स्थान साफ कर दिया’
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से पहले ही कार्रवाई कर दी। उनके अनुसार, आदेश में बेदखली की बात कही गई थी, लेकिन प्रशासन ने पूरे परिसर को एक झटके में साफ कर दिया।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई के लिए दी गई समयसीमा में अभी 22 दिन बाकी थे। इसके बावजूद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने पर उन्होंने सवाल खड़े किए।
‘मस्जिद नहीं, हमारा दिल टूटा’
सांसद इमरान मसूद ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस कार्रवाई में केवल मस्जिद की इमारत को नुकसान नहीं पहुंचा, बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक और सामाजिक महत्व के स्थानों से जुड़ी किसी भी कार्रवाई में संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
‘न्याय मांगने जाएं तो जाएं कहां?’
इमरान मसूद ने न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिक न्याय पाने के लिए न्यायिक व्यवस्था की ओर देखता है, लेकिन यदि किसी आदेश की अलग व्याख्या कर कार्रवाई कर दी जाए तो लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और कानून के प्रावधानों का पालन बेहद जरूरी है।
कार्रवाई को बताया संविधान के खिलाफ
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट विभिन्न मामलों में ध्वस्तीकरण से पहले प्रभावित पक्ष को पर्याप्त समय और कानूनी अवसर देने की बात कह चुके हैं।
इमरान मसूद ने कहा कि कई मामलों में कम से कम 15 दिन की मोहलत देने के सिद्धांत का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सहारनपुर में हुई कार्रवाई को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए मामले में न्याय की मांग की।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई के कानूनी आधार और प्रक्रिया को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इमरान मसूद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।