DMK विधायकों ने मुख्यमंत्री के बयान को विधानसभा की कार्यवाही से हटाने की मांग की थी। मांग नहीं माने जाने के बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए स्पीकर के पोडियम तक पहुंच गए। बाद में उन्होंने स्पीकर के चैंबर के बाहर भी धरना दिया।
MISA और सरकरिया आयोग के जिक्र पर शुरू हुआ विवाद
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही DMK के सचेतक ईवी वेलु ने मुख्यमंत्री विजय के पिछले दिन दिए गए भाषण पर आपत्ति जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा MISA और सरकरिया आयोग का जिक्र किए जाने को लेकर विरोध दर्ज कराया।
DMK ने मांग की कि मुख्यमंत्री के भाषण के संबंधित हिस्सों को विधानसभा रिकॉर्ड से हटाया जाए। विपक्ष का आरोप था कि इन टिप्पणियों से पार्टी और उसके नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
पूर्व DMK सरकार पर लगाए गए थे आरोप
मुख्यमंत्री विजय ने अपने भाषण में पूर्व DMK सरकार पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया था। उन्होंने कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय के एक दस्तावेज का हवाला देते हुए ठेकों से पार्टी फंड जुटाने का आरोप लगाया था।
उन्होंने वीरानम जल योजना और सरकरिया आयोग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया था। इसी के साथ MISA के तहत पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की गिरफ्तारी का मुद्दा भी विधानसभा में उठा।
DMK ने की बयान रिकॉर्ड से हटाने की मांग
DMK विधायकों ने मुख्यमंत्री के बयान को नियमों के खिलाफ बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के बयान का बचाव किया गया।
कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिन तथ्यों का उल्लेख किया, वे आधिकारिक दस्तावेजों और सरकरिया आयोग की रिपोर्ट से जुड़े हुए हैं।
स्पीकर ने बयान हटाने से किया इनकार
स्पीकर JCD प्रभाकर ने DMK की मांग खारिज करते हुए मुख्यमंत्री के बयान को विधानसभा रिकॉर्ड से हटाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल उन जानकारियों का उल्लेख किया है, जो पहले से सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं।
स्पीकर के इस फैसले के बाद विपक्षी विधायकों का विरोध और तेज हो गया। DMK विधायक नारेबाजी करते हुए स्पीकर के पोडियम के सामने पहुंच गए।
एक मिनट का समय, फिर भी नहीं रुका विरोध
हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने DMK विधायकों को अपनी सीटों पर वापस जाने के लिए एक मिनट का समय दिया। उन्होंने कहा कि यदि विधायक अपनी सीटों पर लौटते हैं तो पार्टी के नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा।
इसके बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। स्पीकर ने विधायकों द्वारा बिना अनुमति पोस्टर लेकर सदन में आने पर भी नाराजगी जताई।
मार्शलों ने विधायकों को सदन से बाहर निकाला
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख स्पीकर ने विधानसभा मार्शलों और वॉच एंड वार्ड स्टाफ को प्रदर्शन कर रहे DMK विधायकों को सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया।
इसके बाद मार्शल विरोध कर रहे विधायकों को विधानसभा हॉल से बाहर ले गए। इस दौरान भी DMK विधायक नारेबाजी करते रहे।
स्पीकर के चैंबर के बाहर धरना
सदन से बाहर निकाले जाने के बाद भी DMK विधायकों का विरोध जारी रहा। उन्होंने स्पीकर के चैंबर के बाहर धरना दिया और मुख्यमंत्री विजय के MISA तथा पूर्व DMK सरकार से जुड़े बयानों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग दोहराई।
इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया है। विधानसभा में MISA, सरकरिया आयोग और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने नजर आए।