राम मंदिर के प्रबंधन में CEO पद की शुरुआत को संस्थागत व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मिश्रा मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और अन्य प्रबंधन संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मंदिर प्रशासन और व्यवस्थाओं पर रहेगा फोकस
CEO के रूप में कार्यभार संभालने के बाद जितेंद्र मिश्रा का प्रमुख फोकस राम मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर रहेगा। मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
मंदिर प्रशासन से लेकर सुरक्षा, दान व्यवस्था और श्रद्धालुओं के सुचारू दर्शन तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उनके पास होंगी। उनकी नियुक्ति से राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
हजारों उम्मीदवारों में हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से CEO के चयन के लिए लंबी प्रक्रिया अपनाई गई। बताया गया कि इस पद के लिए करीब 5 हजार उम्मीदवारों के बीच चयन प्रक्रिया हुई, जिसके बाद रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।
ट्रस्ट ने मंदिर की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर नए CEO का चयन किया गया।
भारतीय वायुसेना में 39 साल की सेवा
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उन्होंने करीब 39 वर्षों तक वायुसेना में अपनी सेवाएं दीं और इस दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
वे नेशनल डिफेंस अकादमी के छात्र रह चुके हैं और 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों और अभियानों में जिम्मेदारियां संभालीं।
राम मंदिर की सेवा को बताया सौभाग्य
राम मंदिर CEO के रूप में चयनित होने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने ट्रस्ट का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें जीवन में दो बार सेवा करने का अवसर मिला है—पहली बार देश की सेवा करने का और अब राम मंदिर तथा राम भक्तों की सेवा करने का।
उनकी नियुक्ति को राम मंदिर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में मंदिर प्रशासन, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधाओं को लेकर उनके कार्यों पर सभी की नजर रहेगी।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए नए CEO के सामने व्यवस्थाओं को आधुनिक, पारदर्शी और सुचारू बनाने की बड़ी चुनौती होगी।