मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग और तय समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए।
अमृत मिशन के कार्यों पर नाराजगी, मिशन मोड में काम के निर्देश
मुख्यमंत्री साय ने अमृत मिशन 2.0 के कार्यों की अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने लंबित कार्यों को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण में आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता का उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
38 नगरीय निकायों में बनेंगे नालंदा परिसर
बैठक में युवाओं के लिए बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन ‘नालंदा परिसर’ की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी जानकारी ली।
32 निकायों के लिए आदर्श शहर समृद्धि योजना
प्रदेश के शहरों को सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ शुरू की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत प्रदेश के 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है। वहीं नगरोत्थान योजना के अंतर्गत 14 नगर निगमों में मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास जैसी यातायात सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर देश में छठे स्थान पर
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक हासिल कर देश में छठा स्थान प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए नगर निगम और विभागीय टीम को बधाई दी। उन्होंने शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, नए उद्यान विकसित करने और कम पेड़ों वाले क्षेत्रों की पहचान कर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रत्येक नगरीय निकाय में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम करने को कहा।
पात्र हितग्राहियों को जल्द मिले प्रधानमंत्री आवास
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 और 2.0 की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्वीकृत आवासों के निर्माण, आवंटन और व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को जल्द से जल्द पक्के आवास का लाभ मिलना चाहिए।
चार प्रमुख शहरों में चलेंगी 240 ई-बसें
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के लिए रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है।
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने का काम मार्च 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा से नागरिकों को आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन मिलेगा, साथ ही पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
800 करोड़ की लागत से 8 निकायों में लगेंगे सीबीजी प्लांट
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के आठ नगरीय निकायों में करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
इन प्लांटों का उद्देश्य परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्वच्छ एवं सतत ईंधन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने शहरी अपशिष्ट के बेहतर उपयोग और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर भी आवश्यक निर्देश दिए।
शिकायतों के त्वरित निराकरण पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व और कर संग्रह बढ़ाने पर भी जोर दिया। साथ ही बेहतर कर संग्रह करने वाले निकायों को प्रोत्साहित और सम्मानित करने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं का परिणाम जमीन पर दिखाई देना चाहिए। सभी स्वीकृत कार्यों को गुणवत्ता के साथ तय समय-सीमा में पूरा करने और उनकी लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।