पहले दिखाया छोटा ‘चमत्कार’, फिर बनाया बड़ा जाल
जानकारी के मुताबिक, ठगी की शुरुआत मुंबई से हुई। पुलिस के अनुसार, कथित फर्जी बाबा हिराचंद बर्डे और उसके साथियों ने पहले पीड़ित परिवारों का भरोसा जीतने के लिए एक कथित चमत्कार दिखाया। बताया गया कि एक हजार रुपये के बदले दो लाख रुपये देने का दावा किया गया। इस घटना के बाद पीड़ितों को आरोपियों की बात पर भरोसा हो गया।
इसके बाद आरोपियों ने बड़ा लालच दिया। बाबा ने दावा किया कि विशेष तांत्रिक पूजा के बाद 15 करोड़ रुपये की नोटों की बारिश होगी। जल्द अमीर बनने की उम्मीद में पीड़ितों ने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 10 लाख 95 हजार रुपये आरोपियों को दे दिए।
नासिक बुलाकर कई घंटे कराया पूजा-पाठ
आरोप है कि इसके बाद पीड़ितों को नासिक के अभोणा इलाके में बुलाया गया। यहां तंत्र विद्या और पूजा के नाम पर कई घंटे तक कथित तौर पर ढोंग किया गया। पूजा के बाद आरोपियों ने नोटों से भरी एक बोरी पीड़ितों को सौंप दी।
आरोपियों ने पीड़ितों से कहा कि वे एक सप्ताह तक बोरी न खोलें। सात दिन बाद जब बोरी खोली गई तो उसमें असली नोटों की जगह चूरन वाले नकली नोट मिले। इसके बाद पीड़ितों को अपने साथ हुई ठगी का पता चला।
पैसे वापस मांगने पर धमकी देने का आरोप
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ितों ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे। आरोप है कि इस दौरान उन्हें धमकाया गया। इसके बाद पीड़ितों ने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से संपर्क किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
एक पीड़ित ने पुलिस को बताया कि वह मुंबई का रहने वाला है और कथित बाबा ने उसे एक लाख रुपये के बदले एक करोड़ रुपये देने का लालच दिया था। इसी लालच में उससे लाखों रुपये ठग लिए गए।
पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद नासिक की अभोणा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। अभोणा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक प्रदीप देशमुख के मुताबिक, पुलिस ने कथित फर्जी तांत्रिक हिराचंद बर्डे समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। फिलहाल तीनों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह ठगी का शिकार बनाया था या नहीं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि तंत्र-मंत्र, चमत्कार या कम समय में पैसा दोगुना करने जैसे लालच में आकर किसी को अपनी रकम या संपत्ति न सौंपें।