राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अंतिम परिणामों के अनुसार, प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों में भाजपा सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। वहीं करीब 22 प्रतिशत वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, जो कई निकायों में बोर्ड गठन के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।
10,245 वार्डों का राजनीतिक गणित
निकाय चुनाव के अंतिम परिणामों के अनुसार विभिन्न दलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—
भाजपा: 4,179 सीटें (40.8%)
कांग्रेस: 3,613 सीटें (35.3%)
निर्दलीय: 2,273 सीटें (22.2%)
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP): 63 सीटें
आम आदमी पार्टी (AAP): 42 सीटें
अन्य दल (CPI-M सहित): 75 सीटें
10 नगर निगमों में भाजपा का प्रदर्शन
राज्य के 10 नगर निगमों में से जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा नगर निगम में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। जयपुर नगर निगम में भाजपा ने 150 में से 78 वार्डों पर जीत दर्ज की।
वहीं बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। जोधपुर, अजमेर, अलवर और पाली नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे त्रिशंकु स्थिति बनी हुई है।
मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला। यहां 65 में से 36 वार्डों में निर्दलीयों ने जीत हासिल की, जबकि भाजपा को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं।
निर्दलीय निभाएंगे किंगमेकर की भूमिका
इस चुनाव में छोटे और क्षेत्रीय दलों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आम आदमी पार्टी ने बारां नगर परिषद में बहुमत हासिल किया, जबकि बीकानेर जिले की नोखा नगरपालिका में माकपा (CPI-M) ने बेहतर प्रदर्शन किया।
कई निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण अब महापौर और सभापति के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कई नगर निकायों में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षद किंगमेकर साबित हो सकते हैं।