मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कानूनी मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट में दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं में SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े कुछ प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।

कोल्हापुर बेंच में CEC से जुड़े 14 फैसलों को चुनौती

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बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच में दाखिल एक याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े पिछले करीब 10 महीनों के 14 प्रशासनिक फैसलों/कार्रवाइयों को चुनौती दी गई है। याचिका में दावा किया गया है कि इन फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

याचिकाकर्ता ने इन 14 कार्रवाइयों को रद्द करने के साथ-साथ संबंधित आदेशों और असहमति से जुड़े दस्तावेजों को अदालत के रिकॉर्ड पर रखने की मांग की है।

याचिका में महाराष्ट्र में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा, याचिका में उन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को टालने की मांग का भी उल्लेख है, जहां SIR के बाद नई और कानूनसम्मत मतदाता सूचियां तैयार नहीं हुई हैं।

दूसरी याचिका में SIR की प्रक्रिया पर सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में दाखिल दूसरी याचिका में महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया और उसके तहत अपनाई जा रही कार्यप्रणाली को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा रहे दस्तावेजों, दिशा-निर्देशों और उनके आधार को सार्वजनिक करने की मांग की है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं रही। याचिकाकर्ताओं ने इसे नागरिकों के मतदान के अधिकार से जोड़ते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।

स्वतंत्र न्यायिक समिति की मांग

याचिका में SIR के दौरान कथित तौर पर हुए डेटा डिलीशन और सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की जांच से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही स्पष्ट हो सकेगी।

महाराष्ट्र में SIR के आंकड़ों पर भी बहस

महाराष्ट्र में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्यभर में करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं थे, जो कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत बताया गया। मुंबई में यह अनुपात करीब 34.75 प्रतिशत था। हालांकि, ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है; दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए नाम शामिल कराने का अवसर मौजूद है।

अब इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि अदालत SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े उठाए गए सवालों पर क्या रुख अपनाती है।
Published By- | 25-Sep-2026 12:13:00 pm