बीमार होने का बहाना बनाकर दिया वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक, जेल में बंद कैदियों ने देर रात एक साथी को दौरे पड़ने की बात कहकर शोर मचाया। उनकी आवाज सुनकर ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी मदद के लिए बैरक में पहुंचे। इसी दौरान कैदियों ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया और मौके का फायदा उठाकर जेल से बाहर निकल गए।
इस घटना में पुलिसकर्मी थंगापांडी के सिर में गंभीर चोट आई। दो अन्य जेलकर्मियों को भी चोटें लगने की जानकारी सामने आई है। घायल पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
17 में से चार कैदी गिरफ्तार, बाकी की तलाश तेज
17 में से चार कैदी गिरफ्तार, बाकी की तलाश तेज
घटना के बाद पुलिस ने फरार कैदियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, चार कैदियों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष 13 कैदियों की तलाश के लिए 17 विशेष पुलिस टीमें बनाई गई हैं।
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पुलिस ने आसपास के जिलों में निगरानी बढ़ाने के साथ कई स्थानों पर वाहन जांच भी तेज कर दी है। पड़ोसी जिलों और केरल सीमा की ओर जाने वाले रास्तों पर भी सतर्कता बरती जा रही है।
घायल पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती
घायल पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती
हमले में घायल पुलिसकर्मी थंगापांडी को थेनी के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती रिपोर्टों में उनके सिर पर गंभीर चोट लगने की बात कही गई है। दो अन्य सुरक्षाकर्मियों को भी चोटें आई हैं।
घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस और जेल विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कैदियों को एक ही बैरक में रखने और उनकी निगरानी के दौरान सुरक्षा में कहां चूक हुई।
जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
एक साथ 17 कैदियों के फरार होने की घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कैदियों ने किस तरह एक साथ हमला किया और जेल से बाहर निकलने में सफलता हासिल की।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के बाद जेल सुरक्षा में संभावित लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई भी की गई है। अधिकारियों की जांच में सुरक्षा संबंधी कमियों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
1995 के वेल्लोर जेल ब्रेक की फिर हुई चर्चा
1995 के वेल्लोर जेल ब्रेक की फिर हुई चर्चा
तमिलनाडु में जेल से कैदियों के एक साथ फरार होने की इस घटना की तुलना 1995 में वेल्लोर में हुई बड़ी जेल ब्रेक की वारदात से की जा रही है। उस घटना में वेल्लोर किले के भीतर स्थित विशेष हिरासत केंद्र से लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के 43 संदिग्ध सुरंग बनाकर फरार हो गए थे।
थेनी की घटना ने एक बार फिर राज्य की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस का तलाशी अभियान जारी
पुलिस का तलाशी अभियान जारी
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता फरार 13 कैदियों को पकड़ना है। इसके लिए अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर तलाशी ले रही हैं और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी रखी जा रही है। घटना के पूरे घटनाक्रम और सुरक्षा में संभावित चूक की जांच भी जारी है।
ताजा स्थिति: 17 कैदियों के फरार होने के बाद चार को गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट है। शेष 13 कैदियों की तलाश के लिए 17 विशेष टीमें जुटी हैं। आगे की स्थिति पुलिस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार अपडेट की जानी चाहिए।