रायपुर। आज देशभर में धनतेरस का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार धनतेरस पर ज्योतिषीय दृष्टि से कई शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी-नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। वहीं शुक्रवार और हस्त नक्षत्र का संयोग इस पर्व के महत्व को और बढ़ा रहा है। मान्यता है कि इन शुभ योगों में सोना-चांदी, वाहन और नई संपत्ति की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव आता है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में अगर आप भी आज सोने-चांदी के आभूषण, वाहन या अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले शुभ समय और पूजा के मुहूर्त की जानकारी जरूर लें।

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धनतेरस पर बन रहा लक्ष्मी-नारायण राजयोग, जानें क्यों है खास

ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस पर बुध और शुक्र ग्रह की युति से लक्ष्मी-नारायण राजयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को धन, वैभव और सुख-सुविधाओं की दृष्टि से शुभ माना जाता है।

बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, वाणी और तर्क क्षमता का कारक माना जाता है। वहीं शुक्र ग्रह धन, ऐश्वर्य, प्रेम, विलासिता और भौतिक सुखों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इन दोनों ग्रहों की युति से बनने वाला लक्ष्मी-नारायण योग समृद्धि और आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

शुक्रवार और हस्त नक्षत्र का संयोग बढ़ाएगा पर्व का महत्व

इस वर्ष धनतेरस शुक्रवार को पड़ रही है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी और सुख-संपन्नता से माना जाता है। इसके साथ ही दिन में हस्त नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।

मान्यता है कि हस्त नक्षत्र में सोना-चांदी, आभूषण, वाहन और घर के लिए उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ होता है। इस दौरान की गई खरीदारी को लंबे समय तक सुख और समृद्धि देने वाला माना जाता है।

धनतेरस पर कब से शुरू होगी खरीदारी? जानें शुभ समय

धनतेरस पर त्रयोदशी तिथि में खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस दिन खरीदारी के लिए अलग-अलग समय उपलब्ध रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, स्थिर लग्न में की गई खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है।

इस बार धनतेरस पर दो स्थिर लग्न का संयोग बन रहा है।

कुंभ स्थिर लग्न: दोपहर 1:07 बजे से 2:39 बजे तक।
वृषभ स्थिर लग्न: शाम 5:45 बजे से 7:42 बजे तक।

ज्योतिष शास्त्र में वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ को स्थिर राशियां माना जाता है। इनके उदय होने के समय को स्थिर लग्न कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में की गई खरीदारी लंबे समय तक स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

धनतेरस 2026: पूजा और खरीदारी के महत्वपूर्ण मुहूर्त

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:31 बजे।
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:48 बजे।
खरीदारी का शुभ समय: सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
कुंभ स्थिर लग्न: दोपहर 1:07 बजे से 2:39 बजे तक।
वृषभ स्थिर लग्न: शाम 5:45 बजे से 7:42 बजे तक।
सांध्यकालीन पूजा मुहूर्त: शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक।

ध्यान दें कि शुभ मुहूर्त की गणना स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। पूजा और खरीदारी से पहले अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।

धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

धनतेरस के दिन नई वस्तुएं घर लाने की परंपरा काफी पुरानी है। इस अवसर पर लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चांदी और धातु के बर्तन खरीदते हैं।

इस दिन मुख्य रूप से इन वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है:

सोने और चांदी के आभूषण।
चांदी के सिक्के।
पीतल, तांबे और अन्य धातुओं के बर्तन।
दोपहिया और चारपहिया वाहन।
घर के उपयोग की नई वस्तुएं।

हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में खरीदारी का महत्व श्रद्धा और सामर्थ्य से जुड़ा है। इसलिए सोना-चांदी खरीदना जरूरी नहीं है। आप अपने बजट के अनुसार कोई उपयोगी वस्तु भी घर ला सकते हैं।

धनतेरस पर पूजा का भी है विशेष महत्व

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि को आरोग्य और चिकित्सा का देवता माना जाता है। वहीं माता लक्ष्मी धन-वैभव और भगवान कुबेर धन के संरक्षक माने जाते हैं।

इस दिन शाम को प्रदोष काल में पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान गणेश, धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करें। दीपक जलाकर पुष्प, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करें।

इस तरह इस बार धनतेरस पर शुक्रवार, हस्त नक्षत्र और लक्ष्मी-नारायण राजयोग का शुभ संयोग पर्व को खास बना रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना और सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
Published By- | 06-Nov-2026 10:33:00 am