- दिल्ली पुलिस पर प्रताड़ित करने का लगाया आरोप
Muhammad Junaid : जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों के लिए खाना-पानी जुटाने वाले मोहम्मद जुनैद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। मोहम्मद जुनैद ने दिल्ली पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है। याचिका में कोर्ट से दखल देने की मांग की गई है। मोहम्मद जुनैद प्रोटेस्ट के दौरान पर्दे के पीछे रहकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल युवाओं को भोजन-पीने का पानी की व्यवस्था करते थे।
याचिका में जुनैद ने कहा है कि पुलिस ने उसे दिल्ली से उठाया और 4-5 घंटे के बाद हरिद्वार के पास छोड़ दिया, इस दौरान उसे धमकाया गया। जुनैद का आरोप है कि उनके पिता और बहन की ससुराल के लोगों को भी परेशान किया जा रहा है।
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दरअसल मोहम्मद जुनैद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन शुरू (6 जून से ) होने के बाद से अभिजीत दिपके समेत दूसरे लोगों के लिए खाना-पानी का इंतजाम कर रहे थे। दिपके भी उनके साथ बैठकर खाना खाते थे। अनशन के शुरुआती दिनों में तो जुनैद, सोनम वांगचुक के साथ साए की तरह नजर आते थे। धर्म की वजह से उन्होंने कइयों के ताने भी सुने, फिर भी वो डटे रहे। उन्हें लोग ‘जुनैद भाई’ के नाम से पहचानने लगे और वो आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हो गए थे।
जुनैद की फैमिली ने लगाए थे आरोप-
जुनैद का नाम सुर्खियों में तब आया जब पुलिस उनके घर पहुंच गई और घर की तलाशी ली। परिवार ने बताया कि पुलिस उनके पिता को लेकर थाने गई और बैंक पासबुक, पैनकार्ड समेत कई कागजात सीज कर दिए। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मेरठ में उनके रिश्तेदारों को परेशान किया गया। हालांकि, मेरठ पुलिस ने जुनैद के रिश्तेदारों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार किया और कहा कि जिले के पुलिस स्टेशनों से पूछताछ करने पर ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
पुलिस ने दिल्ली से उठाकर देहरादून में जाकर छोड़ा-
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मन रहा था, तब जुनैद कहां थे? इस पर जुनैद ने कहा कि 24 जुलाई की रात मुझे कुत्ते ने काट लिया था। मैं रैबीज का टीका लगवाने के लिए RML हॉस्पिटल गया था। रात में मैं अपने साथी के साथ घर आ रहा था। तभी रास्त में दिल्ली पुलिस आकर हमें उठा लेते हैं। फिर बहुत देर तक गाड़ी चलती रही। फिर किसी बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर हमको रख दिया। पूरी रात वहीं रखा।
अगले दिन सुबह करीब 11:30 बजे एक अफसर आया। उन्होंने कुछ सवाल-जवाब किए. जैसे खाने-पीने का जुगाड़ कहां से कर रहे, पैसा कहां से आ रहा आदि। हमने कहा की सब लोग मिल जुलकर कर रहे हैं। जाहिर सी बात है कि इतना बड़ा काम एक व्यक्ति के लिए संभव ही नहीं है। जवाबों से वो संतुष्ट हो गए, उन्होंने कहा की इनको ले जाकर छोड़ दो। फिर हमें गाड़ी में बैठाया और दिल्ली की जगह हमें देहरादून (उत्तराखंड) में छोड़कर भाग गए।