नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग में हुए छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज कर सकती है, लेकिन बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी। वहीं, जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।

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मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर सहित महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और केरल में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया तथा पैलेट गन, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 का उल्लंघन बताया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोप स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।

अदालत ने देशभर में छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। इसमें सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा वीडियो, वायरलेस संचार और पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) के रिकॉर्ड शामिल हैं। साथ ही कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डेटा और निजी जानकारी को सुरक्षित रखने तथा उसे सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है। उस दिन संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
Published By- | 28-Jul-2026 06:34:00 pm