क्या बदला?
अब तक नई कारों के लिए 3 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य था। सुप्रीम कोर्ट ने इस अवधि को बढ़ाकर क्रमशः 4 साल और 6 साल कर दिया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि इससे बीमा नियमों का बेहतर पालन होगा और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
56% वाहन बिना बीमा के
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। अदालत ने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 30.48 करोड़ वाहनों में से करीब 16.54 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के हैं, यानी लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना इंश्योरेंस के संचालित हो रहे हैं।
तकनीक से होगी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि:
ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाए।
बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर स्वतः ई-चालान जारी किए जाएं।
पुलिसकर्मियों को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे मौके पर ही वाहन का बीमा स्टेटस जांचा जा सके।
भविष्य में पेट्रोल पंपों को भी बीमा डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जाए।
सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
यह फैसला मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। माना जा रहा है कि नए नियमों से बीमा कवरेज बढ़ेगा, दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में आसानी होगी और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी।