रेलवे की ओर से बोरवेल, हैंडपंप, पानी की टंकियों, पाइपलाइन, नल, प्याऊ और वाटर कूलर तक की जांच की जाएगी। पानी को संक्रमण से मुक्त रखने के लिए सफाई, डिसइन्फेक्शन और गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
टंकियों की सफाई और डिसइन्फेक्शन
अभियान के दौरान पीने के पानी की टंकियों और फिल्टर की सफाई की जाएगी। अंडरग्राउंड और ओवरहेड टैंक, PVC टैंक, वाटर बूथ, नल और वाटर डिस्पेंसिंग पॉइंट की भी जांच होगी।
टंकियों को खाली कर गाद हटाई जाएगी और उनकी अच्छी तरह सफाई के बाद डिसइन्फेक्शन किया जाएगा। टंकियों के ढक्कन, वेंट और ओवरफ्लो पाइप की भी जांच होगी, ताकि पक्षियों, जानवरों या बाहरी गंदगी के जरिए पानी दूषित न हो।
पाइपलाइन और लीकेज की भी होगी जांच
रेलवे खराब टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर की मरम्मत करेगा। जरूरत पड़ने पर खराब उपकरणों को बदला भी जाएगा।
पीने योग्य और गैर-पीने योग्य पानी की पाइपलाइनों के बीच किसी तरह का क्रॉस-कनेक्शन न हो, इसकी भी जांच की जाएगी। साथ ही पाइपलाइन में लीकेज मिलने पर उसे ठीक किया जाएगा, ताकि पानी की बर्बादी और दूषित पानी के प्रवेश को रोका जा सके।
वाटर कूलर और RO/UV सिस्टम की सर्विसिंग
रेलवे के अनुसार हैंडपंप और बोरवेल से मिलने वाले पानी की भी गुणवत्ता जांची जाएगी। वाटर कूलर, RO और UV सिस्टम की सफाई एवं सर्विसिंग की जाएगी। खराब फिल्टर और जरूरी पार्ट्स को समय पर बदला जाएगा।
वाटर वेंडिंग मशीनों से मिलने वाले पानी की भी गुणवत्ता जांच की जाएगी। पानी के सैंपल की फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियल जांच कराई जाएगी।
रोज होगी क्लोरीन की जांच
रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ रेलवे कॉलोनियों में भी पेयजल व्यवस्था की जांच होगी। पानी में क्लोरीन की नियमित जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर दोबारा क्लोरीनेशन किया जाएगा।
पुराने या खराब ओवरहेड और अंडरग्राउंड टैंकों को बदलने या नए टैंक बनाने की योजना भी है। जरूरत के अनुसार पानी के स्रोत और नल के पास ही फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने पर भी काम किया जाएगा।
रेलवे के इस अभियान का उद्देश्य यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना तथा पानी के दूषित होने की संभावना को पहले ही रोकना है।